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राष्ट्रपति चुनाव तक चलेगी यह शतरंज
- By 24hnbc --
- Monday, 20 Jun, 2022
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बिलासपुर - समाचार
बिलासपुर। राष्ट्रपति चुनाव को देखते हुए देश के प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच एक बार फिर से शह और मात का खेल शुरू हो गया। सबसे पहले खबर महाराष्ट्र से आई यहां शिवसेना के एक मंत्री अपनी पार्टी के 30 विधायकों को लेकर गुजरात मेरीडियन होटल में बैठ गए, दलबदल कानून के मुताबिक दो तिहाई सदस्य टूट कर दूसरी पार्टी में जाते हैं तो पद बना रहेगा। शिवसेना के विधानसभा में 55 विधायक हैं दो तिहाई का अर्थ 37 विधायक होता है। अभी 30 भागे हैं महाराष्ट्र विधानसभा कुल विधायक 288 हैं। सरकार बनाने के लिए 144 विधायक होना जरूरी है बीजेपी के पास 106 विधायक हैं और उन्हें 38 विधायकों की और जरूरत है छोटे राजनैतिक दल के 16 और 13 निर्दलीय तो यह संख्या 29 हो जाती है। शिवसेना से 37 विधायक टूटकर जाए तो सरकार बन सकती है किंतु अभी 30 विधायक ही भागे हैं, अब दूसरी खबर विपक्षी दलों ने यशवंत सिन्हा को अपना राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया है हालांकि इस मामले पर अन्य विपक्षी दलों की राय अभी खुलकर नहीं आई है मंगलवार देर शाम बैठक के बाद ही कुछ स्पष्ट होगा यदि यशवंत सिन्हा का नाम ही फाइनल हुआ तो राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला दो भाजपाई नेताओं के बीच हो जाएगा। 2018 में यशवंत सिन्हा ने बीजेपी को बाय बाय कर 2021 में टीएनसी का हाथ थामा था। फिलहाल वे इस पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। देश में राष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना 15 जून को जारी हो गई है, 29 जून को नामांकन जमा करने की अंतिम तारीख है। 18 जुलाई को मतदान होना है 21 जुलाई को परिणाम आएंगे अब तीसरी खबर जो ईडी की राहुल गांधी से पूछताछ से जुड़ी है लगता है पटकथा लेखक को समझ ही नहीं आ रहा कि इस कहानी का अंत कैसे लिखना है अभी कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी को ईडी के दरवाजे पर आना शेष है उन्हें 23 तारीख को पहुंचना है 20 को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली है..... क्या जब तक सोनिया गांधी ईडी दफ्तर नहीं पहुंचेगी तब तक राहुल की पेशी चलती रहेगी यदि पहुंच गई तो राहुल और श्रीमती गांधी आमने-सामने बिठाकर पूछताछ कब होगी और तब तक क्या कांग्रेस आंदोलन करती रहेगी सब कुछ राजनैतिक शतरंज का खेल है देश की राजधानी पर भाजपा शासन कर रही है किंतु दिल्ली उसकी नहीं है और देश की औद्योगिक राजधानी में जब तक भाजपा का कब्जा नहीं होगा देश पर शासन अधूरा सा लगता है सो राष्ट्रपति मतदान के पूर्व सब कुछ एक साथ हासिल करने की कवायद तेजी से चल रही है गुजरात चुनाव में उतरने के पूर्व महाराष्ट्र पर फतह जरूरी है आखिर गुजरातियों के मान का सवाल है। मराठा मानुष को धूल चटा देंगे भले ही भारतीय सेना में एक भी रेजिमेंट गुजरात के नाम पर नहीं है किंतु राजनीति में तो इन्हीं की चल रही है।


