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गब्बर के डर से चुप...... और जगीरा का कमीनापन.... कौन बचाएगा लोकतंत्र ......

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। आज नहीं तो कल गब्बर के डर से छुपे हुए सब मतदाता, विधायक मतदान स्थल पर चार्टर्ड प्लेन से पहुंचा दिए जाएंगे, यह राज्यसभा चुनाव देश के लोकतंत्र में आई गिरावट का नया अध्याय है। पिछले 5 दिनों से मीडिया का एक बड़ा वर्ग छुप कर बैठे मतदाता विधायक की खबर तो दिखा रहा है किंतु उस गब्बर की बात कोई नहीं करता जिसके डर से मां ने बच्चों को यह कहा की "चुप हो जा बेटा नहीं तो गब्बर आ जाएगा" एक बार फिर से छात्र संघ चुनाव का वह दौर याद करें जब कॉलेजों के अध्यक्ष , सचिव मिलकर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष और सचिव चुनते थे। कॉलेज छात्र संघ का चुनाव परिणाम आने के बाद ही विश्वविद्यालय का चुनाव लड़ रहे, बाहुबली नेता निर्वाचित अध्यक्ष, सचिवों को मेहमान नवाजी करने बंधक बना लेते थे और यह बंधक माल कब तक बंधक रहता था जब तक उनके पक्ष में मतदान नहीं हो जाता था सरकार विश्वविद्यालय प्रशासन जब इस गुंडागर्दी पर लगाम नहीं कर सका तो चुनाव ही बंद कर दिया गया और लंबे समय तक बंद रहा । तर्क दिया गया चुनाव से शिक्षा की गुणवत्ता खराब हो रही है। ऐसा लगता है कि दो दशक बीत जाने के बाद भी शिक्षा की गुणवत्ता लोकतंत्र की गुणवत्ता में सुधार के स्थान पर पता नहीं हुआ है और गब्बर मजबूत से मजबूत होता चला गया। उसे मजबूती के साथ लोकतंत्र के कुछ खंभों का भरपूर सहारा भी मिला इन दिनों जब हर संवैधानिक संस्था पर ईडी का चौकीदार खडा हो और पार्षद के घर से लेकर कितनी भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि या दिखावटी जनप्रतिनिधि के घर पर घंटी बजाई जा सकती हो तो लोकतंत्र का बचना किस काम का राज्यसभा में या किसी भी सदन में किसी भी तरह निर्वाचित होकर पहुंच भी गए तो क्या जुवान निष्पक्ष होकर बोल सकेगी । वह हिम्मत कहां से आई थी फिर याद करें फिल्म चाइना गेट का गब्बर का रूपांतरित चरित्र का डायलॉग "मुझसे लड़ने की हिम्मत तो ले आओगे कमीनापन कहां से लाओगे"।