No icon

24hnbc

अंबिकापुर जसपुर नहीं है बाबा जूदेव नहीं है....

24hnbc.com
समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। सरगुजा के राजनीति में एक बड़े बदलाव की आहट साफ दिखाई देती है। टीएस सिंह देव का यह बयान जब हमारे पास 80 साल का कोयला भंडार है और हमने 2030 तक बिजली के लिए कोयले पर निर्भरता पूरी तरह से छोड़ देने का फैसला किया है तब घने जंगलों जैव विविधता से भरपूर हसदेव को क्यों नष्ट करें। कल जब सिंह देव अंबिकापुर के उस क्षेत्र में थे जहां पेड़ों की कटाई हो रही है और आम जनता ऐसा नहीं होने देना चाहते, वहीं पर एक भीड़ को संबोधित करने के पूर्व भीड़ ने कहा आप ही हमारे सीएम हैं, आप ही हमारे महाराजा हैं, और आप ही हमारे विधायक हैं, अपने भाषण में सिंह देव ने कहा मैं सीएम नहीं हूं...... मैं आपका नेता जरूर हूं और आप एकता के साथ खड़े हो मैं आपकी बात ऊपर रखूंगा। मैं सबसे पहले सामने होउगा अगर आप बैठे हुए हैं तब हमारे लिए आपके साथ खड़ा होना मुश्किल हो जाता है इसलिए आपको एक जूट रहना चाहिए इस वाक्य का सीधा अर्थ है कि वे ताकतें सक्रीय हो गई जो आंदोलन को तोड़ना चाहती है। 
जानकार बताते हैं कि जब हेलीपैड पर सिंह देव का हेलीकॉप्टर उतरने वाला था तब हेलीपैड पर खासी भीड़ थी, किंतु यह भीड़ उनके समर्थकों की नहीं थी खदान से प्रायोजित होकर लाई गई थी। यहां पर स्वागत सत्कार का आडंबर भी नहीं हुआ माना जाता है कि सिंह देव को उनके करीबियों ने भीड़ की असलियत बता दी थी। आज जब अंबिकापुर में कोयला खनन, पेड़ कटाई अडानी की चर्चा इतनी आम है तो हम एक बार फिर से 2014 में विधानसभा चुनाव कांग्रेस के उस समय के अध्यक्ष के भाषण प्रचार में टी एस सिंह देव की प्रभावशीलता और चुनाव के बाद दिल्ली में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के लिए हाईकमान की एक्सरसाइज को याद दिलाना चाहते हैं। लगभग टी एस का मुख्यमंत्री बनना तय था नाम भर घोषित होना था, अचानक दिल्ली का वो मीडिया जो इस घोषणा से इत्तेफाक नहीं रखता था सक्रिय हुआ और वह कहानियां बाहर आने लगी जिससे यह की बाबा तो अडानी के ही हैं ऐसे में बाबा को कमान देना मतलब अदानी को छत्तीसगढ़ शौप देना, घोषणा रुक गई फिर बैठक का दौर चला और मामला आधे आधे पर आ गया जानकार इसके अलावा एक अन्य मसले की भी चर्चा करते हैं मुख्यमंत्री बनने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री जो 2001 से थे उनके साथ निपटाने की कार्यवाही कहते होगी बाद सफर सब ने देखा है 2001 से 2003 के मुख्यमंत्री के साथ कैसा व्यवहार हुआ और वह व्यवहार उनकी मृत्यु के बाद भी आज तक जारी है साथ ही उद्योगपतियों के साथ कैसे संबंध रखे गए आज भी भारतीय जनता पार्टी सिंह देव में संभावनाएं तलाश रही है यह भाजपा की आदत है सत्ता के खिलाफ उनमें संघर्ष करने की क्षमता नहीं है कभी प्रायोजित एनजीओ तो कभी राजनीतिक दल के भाड़े के नेता के बहाने सत्ता बदलने की जुगत और रायपुर में विधायक बृजमोहन का बयान, नेता प्रतिपक्ष का बयान इसी बात को इंगित करते हैं । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा बाबा चाहे तो अंबिकापुर में पेड़ क्या टहनी तक नहीं कटेगी। इशारा दो अर्थ बताता है एक अर्थ जो कुछ हो रहा है उन्हीं के कारण हो रहा है और रोकना भी उन्हीं के हाथों में हैं जबकि ऐसा है नहीं टीएस दिलीप सिंह जूदेव नहीं है और अंबिकापुर जसपुर नहीं है यह कहानी फिर कभी फिलहाल तो छत्तीसगढ़ के दोनों पर्यवेक्षक अपनी अपनी जिम्मेदारी को निभाये, परिणाम राज्यसभा के चुनाव के बाद आने वाला है।