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दिल्ली, रायपुर, सरगुजा के बीच कब तक चलेगा पेंडुलम

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। जैसे-जैसे छत्तीसगढ़ में सरकार के मुखिया का समीक्षा दौरा आगे बढ़ेगा वैसे वैसे पार्टी में नेताओं के बीच एकता की कलई खुलती जाएगी। मुख्यमंत्री सहित जो नेता भी समीक्षा दौरा कर रहे हैं वे योजनाओं की समीक्षा से ज्यादा चेस बोर्ड पर अपने मोहरे बिठालने का अभ्यास कर रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ मंत्री पत्रकारों के प्रश्नों के जवाब में जो उत्तर देते हैं वह व्यंग्यात्मक ज्यादा होता है ऐसे में यह कहना उचित होगा की समीक्षा होते होते छत्तीसगढ़ सरकार के वरिष्ठ मंत्री टीएस सिंह देव अपना रास्ता तय कर चुके होंगे। समीक्षा दौरा जैसे ही शुरू हुआ और स्वास्थ्य मंत्री के दौरा कार्यक्रम को अखबार में अधिक तवज्जो मिली तुरंत ही दो और मंत्रियों को हेलीकॉप्टर मुहैया कराकर स्वास्थ्य मंत्री की खबरों को बैलेंस कर दिया गया। जो दो मंत्री अब हवा में उड़ रहे हैं उनमें एक ब्राह्मण और दूसरा आदिवासी है। पिछले विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस नेता और उस समय के प्रदेश अध्यक्ष का मुख्य एजेंडा नक्सली क्षेत्र में शांति वार्ता होती थी यहां तक की उन्होंने एक से अधिक बार जेल में बंद नक्सली नेताओं से मुलाकात की उस समय कांग्रेस की नक्सल नीति कैसी होगी में कुछ पत्रकारों की विशेष भूमिका भी रही बाद में यही पत्रकार मुख्यमंत्री के अधिकृत सलाहकार भी बन गए। इस बार नक्सली नेताओं ने शांतिवार्ता का प्रस्ताव तब रखा जब बस्तर में स्वास्थ्य मंत्री का दौरा चल रहा था आनन-फानन में मुख्यमंत्री ने शांतिवार्ता को यह कहकर खारिज कर दिया कि पहले नक्सली भारतीय संविधान में विश्वास व्यक्त करें बस्तर क्षेत्र में इन दिनों संविधान में विश्वास किसका कितना है और कौन संविधान को मानकर किसकी सेवा में लगा है इस बात पर गहनता से मंथन होना चाहिए। उसके बाद उभयपक्षों को संविधान में विश्वास रखकर शांतिवार्ता शुरू करना चाहिए। बातचीत का वातावरण पहले बने यह जरूरी है। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच लगातार मनभेद-मतभेद स्पष्ट होते जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि टीएस सिंह देव पर अब उनके समर्थकों का भी दबाव है और समर्थक चाहते हैं कि बाबा अब फैसला करें बहुत दिन तक सरगुजा, रायपुर, दिल्ली के बीच पेंडुलम बंद कर कोई लटकना नहीं चाहता।