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लोकतंत्र और आपातकाल राजनीतिक दल सुविधा अनुसार बनाते हैं सिद्धांत

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । प्रत्येक राजनीतिक दल दूसरे को बोलता है अलोकतांत्रिक विपक्ष में जब रहते हैं तभी लोकतांत्रिक अधिकारों की अहमियत समझ आती है। यह बात इन दिनों छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को बखूबी समझ आ रही है। 1 मई जब मजदूर दिवस के दिन सत्ताधारी दल के नेता और सरकारी कर्मचारी बोरे बासी खाकर श्रम दिवस मना रहे थे तभी भारतीय जनता पार्टी के नेता जिला मुख्यालयों पर पत्रकार वार्ता के माध्यम से 22 अप्रैल 2022 के उसे सरकारी आदेश की आलोचना कर रहे थे, जिसमें सभा, रैली, जन आंदोलन के लिए 19 नियम बनाए गए। 1 मई को बोरे बासी खाते समय किसी ने भी कोविड काल में आत्महत्या करने वाले हजारों श्रमिकों को याद नहीं किया जिनकी मृत्यु के पीछे कहीं ना कहीं सत्ताधारी दल और व्यवस्था जिम्मेदार है। उल्टे बोरे बासी को उत्सव की तरह मनाया गया यह उन तमाम श्रमिकों के मुंह पर तमाचा है जो काम न मिलने के कारण घर बैठे हैं और अब तो बाजार से नाउम्मीद होकर करोड़ों लोगों ने काम मांगना भी बंद कर दिया है। 1 मई के दिन ही बिलासपुर में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने भाजपा कार्यालय में पत्रकार वार्ता की और समाज के सभी संगठनों को बताया कि वर्तमान सरकार और उसके मुख्यमत्री भूपेश बघेल लोकतंत्र विरोधी हैं इमरजेंसी के मददगार हैं इसलिए धरना आंदोलन को नियमों से बांध रहे हैं। 22 तारीख को सरकार ने जिस आदेश के आधार पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित किया है हम उसका घोर विरोध करते हैं निंदा करते हैं और 15 दिन का सरकार को समय देते हैं कि वह इस गैर लोकतांत्रिक आदेश को बिना शर्त वापस ले अन्यथा 16 वे दिन इस आदेश के खिलाफ जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सदा से आपातकाल को पसंद करने वाली पार्टी है और भाजपा लोकतांत्रिक राजनीतिक दल है । हम भूपेश सरकार कि लोकतंत्र विरोधी साजिश को नाकाम करेंगे। पत्रकार वार्ता में जब उनसे पूछा गया की उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश में भी स्थानीय सरकारों ने रैली, सभा, आंदोलन को आयोजित करने के नियम बनाए हैं उन्हें आप किस तरह लेते हैं तो उनका कहना था मैं छत्तीसगढ़ में रहता हूं और छत्तीसगढ़ की ही बात करूंगा।