No icon

24hnbc

टिकट का पता नहीं किंतु पन्ना प्रमुख हुए मानदेय वाले बिलासपुर की राजनीति ने ली करवट

24hnbc.com
समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। बिलासपुर से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। हम खबरों में बने रहने की बात नहीं कर रहे हैं हम बात कर रहे हैं बूथ एवं कार्यकर्ता स्तर पर तैयारी कि, राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि विपक्षी राजनीतिक दल के एक नेता ने वार्ड स्तर पर बैठकों का क्रम शुरू कर दिया है वे अपने साथ मीटिंग के दौरान 18 बिंदु वाला एक पर्चा भी लाते हैं और कार्यकर्ताओं को बताते हैं कि इन 18 बिंदुओं पर वे आम नागरिकों से चर्चा करें । 18 बिंदुओं में से अधिकतर बिंदु स्थानीय समस्याओं सरकारी कामकाज से संबंधित हैं। कानून व्यवस्था भी एक बड़ा मुद्दा है किंतु इन सबसे हटकर जो बात कार्यकर्ताओं को आश्चर्य में डालती है वह है पन्ना प्रमुखों का चयन और यह चयन मानदेय के साथ है। बताया जाता है कि हर वार्ड में औसतन 10 ऐसे मानदेय वाले पन्ना प्रमुख होंगे जो सीधे अपने नियुक्ति करता को रिपोर्ट देंगे। इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है बिलासपुर विधानसभा के अंतर्गत 56 वार्ड आते हैं 10 पन्ना प्रमुख प्रति वार्ड बनाए गए तो विधानसभा चुनाव की घोषणा तक यह खर्च 1 करोड़ 50 लाख को स्पर्श करेगा इस तरह की तैयारी की चर्चा मात्र से टिकट के अन्य दावेदारों के बीच खलबली मची है ऐसी राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा है कि बिलासपुर में इस बार विपक्षी दल में टिकट का बड़ा घमासान होने वाला है। टिकट के तीन दावेदार ना केवल आरएसएस पृष्ठभूमि से हैं साथ ही वे चिकित्सा पेशे से भी जुड़े हैं। अगर टिकट घोषणा के पूर्व ही बूथ स्तर पर पन्ना प्रमुख की नियुक्ति व्यक्तिगत रूप से हो रही है तो राजनीतिक दल का अनुशासन क्या मायने रखता है कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि कांग्रेस वाली बीमारी यहां भी लग गई। दूसरी ओर कांग्रेसी इन खबरों पर चुटकी लेते हैं हालांकि कांग्रेस की स्थिति भी कोई मजबूत नहीं है। हाल ही में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करवाया है उसमें बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कुछ कमियां पाई गई है साथ ही इस राजनैतिक दल में टिकट का धमाका हमेशा होता है हर वर्तमान विधायक को टिकट मिलेगा ही इसका भी कोई पक्का दावा नहीं किया जा सकता है। इस बीच में एक तीसरा राजनैतिक दल भी बिलासपुर में अपनी जगह बनाने के लिए दांवपेच कर रहा है। राज्यसभा पहुंचने के पूर्व ही मुंगेली वाले पाठक जी कुछ लोगों को मुंगेरीलाल के हसीन सपने दिखा गए हैं छोटी-छोटी बात पर अपने वरिष्ठों की नकल और पत्रकार वार्ता इसे झाड़ू वाली पार्टी की आदत है। जितना आंदोलन नहीं हो रहा उससे ज्यादा पत्रकार वार्ता होती है और यह दावा किया जाता है कि संबंधित अधिकारी को ज्ञापन दिया गया है पता करने पर अधिकारी ज्ञापन मिलने से ही इंकार कर देता है किंतु खबरों में झाड़ू वाली पार्टी स्थान बनाती है और इसकी कटिंग अपने प्रभारी को भेजी जाती है हालांकि अब लोग यह पूछ रहे हैं कि पुराने कार्यकर्ता और आदर्शवादी बात करने वाले नेता कहां गए. ....?