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आने वाले विधानसभा चुनाव में आरएसएस के लिए विशेष स्थान रखता है बिलासपुर

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। नागपुर में आरएसएस का मुख्यालय है जिसकी बिलासपुर से दूरी 400 किलोमीटर से कम है। उसके बावजूद वर्ष 2018 के चुनाव में बिलासपुर में भारतीय जनता पार्टी के नेता अमर अग्रवाल की करारी नहीं शर्मनाक पराजय हुई। भाजपा का बड़ा दरख़्त धड़ाम से गिरा राजनीति के जानकार मानते हैं कि वर्ष 2018 के चुनाव में आरएसएस की नाराजगी बिलासपुर में भाजपा को भारी पड़ गई किंतु इस बार बिलासपुर जिले के राजनीतिक समीकरणों में आरएसएस के वह प्रकल्प जिनका राजनीति से सीधा संबंध है रुचि ले रहे हैं ऐसा माना जाता है की इस बार बिलासपुर विधानसभा की टिकट किसी प्रोफेशनल को प्राप्त होगी और वह राजनीति से सीधा सरोकार रखने वाला व्यक्ति नहीं होगा। फिर चाहे वह सीए हो, विधि विशेषज्ञ हो, डॉक्टर हो या बड़ा इंजीनियर किंतु टिकट तो राजनीति से बाहर के विशेष क्षेत्र वालों को ही मिलनी है इसका सीधा अर्थ है कि बिलासपुर की राजनीति में ठेठ मारवाड़ी पन का विदा हो जाना हालांकि इन दिनों एक व्यापारिक कौम भी भाजपा से टिकट का बड़ा दावा कर रही है वे आडवाणी युग से लेकर पुरानी भाजपा के समय की सेवा का जिक्र भी करते हैं और कहते हैं कि जीएसटी की मार से सबसे ज्यादा परेशान, प्रताड़ित, बर्बाद ट्रेड लाइन के व्यापारी हैं। ऐसे में विस्थापन के बाद पुनर्वास दिखाना जरूरी है। तभी नाराज व्यापारी का वोट बिलासपुर में दुबारा पार्टी खाते में आएगा बिलासपुर से इस वर्ग को टिकट मिलने से तखतपुर और बेलतरा भी प्रभावित होगा ऐसा वर्ग विशेष का मानना है जबकि दूसरी ओर पेशेवर बुद्धिजीवी वर्ग जो अपनी योग्यता के आधार पर आरएसएस से लंबे समय से जुड़ा है और छत्तीसगढ़ की राजनीति में आरएसएस की भूमिका और उस भूमिका की कार्यान्वयन में बिलासपुर शहर की अहमियत जानता है का विचार इससे उल्टा है और इस बार माना जा रहा है कि बिलासपुर के भाजपा टिकट चयन में आरएसएस की भूमिका गंभीर से गंभीरतर होगी ।