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अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष ने छोडी कांग्रेस बने आप के जिलाध्यक्ष

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के महाधिवक्ता कार्यालय से 2 अधिवक्ताओं ने नए साल के प्रथम 6 दिन के अंदर ही इस्तीफा दिया इसे कांग्रेस पार्टी के लिए नुकसान के तरह देखा जा रहा है। एक अधिवक्ता विवेक रंजन तिवारी और दूसरे सलीम काजी विवेक जी का परिवार खाटी कांग्रेसी परिवारों में गिना जाता है उनके दादा विधायक भी रहे इस्तीफे का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि वह अब अपने निजी विधि व्यवसाय के तरफ ध्यान देना चाहते हैं इस मसले को इतना ही माना जाए तो दूसरा इस्तीफा सलीम काजी का है। सलीम काजी अल्पसंख्यक वर्ग से आते हैं और वे कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष भी थे इतना ही नहीं वह कग्रेस के विधि प्रकोष्ठ के पदाधिकारी भी थे लिहाजा ये माना जाए की जब उन्हें उप महाधिवक्ता बनाकर लिया गया तो कांग्रेस के आईडियोलॉजी और थिंकटैक में एक उपयोगी आदमी जुड़ा महाधिवक्ता पद से इस्तीफा देने के बाद सलीम काजी आप पार्टी से जुड़ गए और उन्हें संगठन ने बिलासपुर जिले का अध्यक्ष बनाया है। सलीम काजी विभिन्न मुद्दों को लेकर खासे सक्रिय रहते थे वह 1 महीने से ज्यादा राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के मामले में भी आंदोलनरत थे अब आप में हैं इस संदर्भ में जब कांग्रेस के शहर अध्यक्ष से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सलीम काजी का कोई इस्तीफा उन्हें नहीं मिला है अब जब दूसरा राजनैतिक दल स्वीकार कर लिया तो हम यह मानते हैं कि उन्होंने कांग्रेस छोड़ दिया मामला इतना सीधा नहीं जान पड़ता आप राजनैतिक दल छत्तीसगढ़ में पिछले विधानसभा चुनाव से काम कर रहा है पार्टी के पेड कार्यकर्ताओं ने पूरी मेहनत के साथ आप का ढांचा तैयार कर कर रखा है जिसका लाभ वे अब कांग्रेस के खिलाफ ही करेंगे सलीम काजी और वर्तमान महाधिवक्ता के साथ दो अन्य ऐसे एडवोकेट रहे जिन्होंने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का साथ कानूनी मामलों में तब दिया जब प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी चना घोटाला, आबकारी घोटाला, नान घोटाला, कैंपा फंड का दुरुपयोग जैसे चर्चित मामले रिट पिटिशन हो या जनहित याचिका इन्ही अधिवक्ताओं के द्वारा लगाई जाती थी क्या ऐसा माना जाए कि सरकार बनने के बाद इनमें से कुछ लोग सरकार की नीति से नाखुश हैं या इसे केवल काम का दबाव माना जाए सलीम काजी खुल कर ना केवल बोलते हैं बल्कि एक दैनिक अंग्रेजी अखबार में लिखने का भी काम करते हैं ऐसे में उनके हाथ में रोज यह छूट है कि वह सत्ताधारी पार्टी की आलोचना में लग जाएं और यदि ऐसा हुआ तो कांग्रेस का लिखकर पढ़कर और क्रियात्मक रूप से सड़क पर सलीम काजी रोज नुकसान करेंगे जिसका कोई माकूल जवाब कांग्रेस को खोजना चाहिए।