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संसदीय सचिव, संगठन में सचिव विकास की पत्रकार वार्ता सत्ताधारी पार्टी के प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं थी, संगठन ने खोया बड़ा मौका

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य की सत्ता में भारी बहुमत से का बीज कांग्रेस संगठन की बिलासपुर हालत ठीक नहीं लगती पहले संगठन में पदों को लेकर खटपट थी प्रदेश अध्यक्ष ने अचानक एक व्यक्ति एक पद जैसा स्लोगन मारते हुए शहर अध्यक्ष बिलासपुर पद पर नई नियुक्ति कर दी। कारण यह बताया गया कि ऐसा तो होना ही था क्योंकि शहर अध्यक्ष सहकारी बैंक के अध्यक्ष बना दिए गए जब यह तब्दीली हुई उसी समय विधायक से संगठन का विवाद भी हुआ था कल संसदीय सचिव विकास उपाध्याय जो संगठन के राष्ट्रीय पदाधिकारी भी हैं की एक पत्रकार वार्ता कांग्रेस दफ्तर में आयोजित हुई। कांग्रेस पार्टी मीडिया के साथ इतनी खुली हुई है कि पत्रकार वार्ताओं की औपचारिक तहजीब भी समाप्त होती जा रही है। विकास उपाध्याय प्रदेश कांग्रेस के उभरते हुए प्रभावशाली नेता हैं राष्ट्रीय संगठन में सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर हैं प्रदेश के बाहर विधानसभा चुनाव में उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका भी दी जाती है किंतु उनके कद के अनुरूप शहर कांग्रेस जिसमें जिला कांग्रेस ग्रामीण भी शामिल है ने उन्हें कल उतनी तवज्जो नहीं दी कांग्रेस भवन के भीतर पत्रकार वार्ता के दौरान जिस तरह का हल्का पन देखने मिला वह किसी सत्ताधारी पार्टी की पत्रकार वार्ता के प्रोटोकॉल के खिलाफ था। शहर अध्यक्ष पद पर नई नियुक्ति के बावजूद कांग्रेस पार्टी के रंग बदलते नहीं दिखे कार्यकर्ता वैसे ही बेलगाम है और वरिष्ठ नेता अपने युवा कार्यकर्ताओं को शांत भी नहीं कर पाते वैसे भी इन दिनों कांग्रेस के परंपरागत नेता और युवा कार्यकर्ताओं के बीच पैचप नहीं हो पा रहा, इसी का परिणाम था कि विजय पांडे जैसे सबको साथ लेकर चलने वाले नेता को शहर कांग्रेस की कमान मिली थी उन्हें इस पद पर बैठे लगभग 2 माह से अधिक का समय हो रहा है किंतु पार्टी पर प्रभावशाली नियंत्रण दिखाई नहीं देता विकास उपाध्याय का शहर आना एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होता क्योंकि इन्हीं दिनों कांग्रेस पार्टी महंगाई जो कि आम आदमी का मुद्दा है पर जागरण रैली कर रही है। किंतु पत्रकार वार्ता की अव्यवस्था से कांग्रेस ने एक अच्छा मौका खो दिया विकास में महंगाई पर केंद्र सरकार पर मोदी सरकार पर भाजपा पर तीखे हमले किए पर उन्हीं के कार्यकर्ता नेता और पत्रकारों के बीच ढाल बनकर खड़े हो गए कार्यकर्ताओं के शोरगुल में विकास की बात पत्रकारों को सुनाई ही नहीं दी तो कोई रटा रटाया या पत्रकार वार्ता का कागज जो प्रवक्ता ने यह कहते हुए नहीं दिया की फोटोकॉपी की कमी है तो पत्रकार वार्ता लिखे कैसे....?