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मामला केवल जनप्रतिनिधि के अपमान का नहीं बिलासा के मान की हिफाजत का भी . ...
- By 24hnbc --
- Tuesday, 09 Nov, 2021
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। पीसीसी के निर्देश पर शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने एक जांच समिति का गठन किया जो इन दिनों शहर कांग्रेस के उपाध्यक्ष द्वारा सिविल लाइन थाने में बैठकर शहर विधायक के खिलाफ कहे गए अपमानजनक शब्दों के बाद, उपजी हुई परिस्थिति पर जांच कर रही है । जांच दल के 3 सदस्य हैं और वे कांग्रेस भवन में बैठकर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दे रहे हैं यहां पर यह याद रखना जरूरी है कि हाल ही में शहर कांग्रेस उपाध्यक्ष के विरुद्ध सिविल लाइन थाने में अपराध भी पंजीबद्ध हुआ है और उसी मामले में पुलिस अधीक्षक बिलासपुर ने सिविल लाइन थाने के दो सिपाहियों को लाइन हाजिर भी किया है। असल में यह पूरा मामला तब सामने आया जब शहर उपाध्यक्ष मगरपारा रोड स्थित एक जमीन को गुंडागर्दी पूर्वक खाली कराने का प्रयास कर रहे थे उनका यह प्रयास अभी भी जारी है और उस भूखंड के मालिकों ने जो सब के सब महिलाएं हैं एससी हैं ने लिखित शिकायत सिविल लाइन थाने में दी है। कांग्रेस के शहर उपाध्यक्ष ने न केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अपशब्द कहें, उन्होंने मीडिया को भी दो टके की संज्ञा देते हुए शहर बिलासपुर के सम्मान को ठेस पहुंचाई और कांग्रेस के बेहद सम्मानित पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष को भी अपशब्द कहे। जांच समिति याद करें कि कुछ माह पूर्व बिलासपुर शहर के पूर्व विधायक ने शहर में बढ़ रहे माफिया राज पर तंज कसे थे और जिस व्यक्ति पर आज जांच बैठी है उसे कई बार जमीन माफिया के रूप में प्रसिद्धि मिली है। जानकार बताते हैं कि इन दिनों यह माफिया एक होटल व्यवसायी के लिए इन दिनों काम कर रहा है जांच समिति के सदस्य कई बार यह कहते सुने गए कि विधायक समर्थक शहर उपाध्यक्ष के पुराने कारनामे को ना बताएं ऐसा क्यों ना हो इसी शहर उपाध्यक्ष ने जब वह ब्लॉक 2 का अध्यक्ष हुआ करता था तब कोनी थाना परिसर में अपने ही राजनीतिक दल को अपशब्द कहे थे उस वक्त की घटना में महेश टाटा और अभय नारायण भी उनके गुस्से का शिकार बने थे तब शहर कांग्रेस की कमान नरेंद्र बोलर जी के हाथ में थी और दबाव बढ़ने पर ब्लॉक 2 के अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया था । कुछ दिन तक इन्हीं के पास रेलवे का एक बड़ा ठेका हुआ करता था तब के विज्ञापनों में यह चेहरा स्वयं को सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बताया करता था समय बदला कांग्रेस को सत्ता प्राप्त हुई कब सामाजिक कार्यकर्ता कांग्रेस नेता बन गया कौन मेहरबान था जिसके रिकमेंडेशन पर पूर्व शहर अध्यक्ष ने इन्हें अपना उपाध्यक्ष बना लिया। शहर राजनीति के जानकार बताते हैं कि जब भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अमर अग्रवाल ने अपना अंतिम चुनाव जीता था तब कांग्रेस प्रत्याशी के हार मे इसी सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका बेहद बड़ी थी और उस समय यह दावा किया जाता था कि इस बार तो पार्टी को कार्यकर्ता मिल गए बाद में कार्यकर्ता भी नहीं मिलेंगे । अब गेंद जांच समिति के पाले में है कांग्रेस पार्टी ने सरगीक न्याय के सिद्धांत पर पूरा भरोसा करती है। तभी तो सभी पक्षों को सुन रही है अन्यथा ऐसे मामले में तो पहले निष्कासन की चाबुक पड़ती और बाद में सुनवाई होती।


