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आम आदमी रोज हो रहा बेइज्जत जनप्रतिनिधियों को हो रही अपनी प्रतिष्ठा की चिंता

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सिम्स में हड़ताल का आज 41 वां दिन है इस दौरान उच्च स्तरीय मीटिंग के बाद आंदोलनकारी 316 कर्मचारी और सरकार के बीच समझौता तो हो गया है पर कर्मचारी हैं कि जब तक आदेश की मूल प्रति ना मिल जाए आंदोलन समाप्त करना नहीं चाहते, असल में इसके पीछे पूर्व सरकारों की विश्वसनीयता जीरो बड़ा कारण है । बिलासपुर में प्रदेश के मुख्यमंत्री के विश्वसत सलाहकार कांग्रेस संगठन ने दो नंबर की हैसियत रखने वाले नेता बैठे हैं पर उन्हें भी सिम्स के हड़ताल के कारण लूट रही आम जनता की परेशानियों से कोई वास्ता नहीं दिखता कांग्रेस की सरकार है कांग्रेस के संसदीय सचिव, विधायक, आयोग मंडलों के अध्यक्ष और जिला पंचायत से लेकर नगरी निकायों के बड़े-बड़े पदनाम कई सारे छाया विधायक बिलासपुर में निवासरत है जो रोज अपने राजनैतिक हितों के लिए लड़ते देखे जा सकते हैं क्या वे एक बार 300 आंदोलनकारियों के सामने जाकर उन्हें हड़ताल समाप्त करने का आदेश नहीं दे सकते आश्वासन दे दें कि यदि उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो सामने खड़े सभी नेता अपने अपने पदों से इस्तीफा दे देंगे। समाज में आज भी इन नेताओं की इतनी प्रतिष्ठा तो है ही कि इनके ऐसे कथनों पर विश्वास करके आंदोलनकारी काम पर लौट जाएंगे और सिम्स में आम जनता का काम प्रारंभ हो जाएगा और निजी क्षेत्र में रोज की मची लूट पर कुछ अंकुश लगेगा। डॉक्टरों को हड़ताल लाभप्रद नजर आ रही है सरकारी डॉक्टर का कमीशन रोज बढ़ रहा है और निजी चिकित्सा केंद्रों पर ओपीडी बढी है दोनों पक्ष धंधा बढ़ने से खुश हैं । हड़ताल क्यों समाप्त हो दूसरी ओर नेता अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई में व्यस्त हैं हड़ताल क्यों खत्म हो, विधायकों को दिल्ली जाने से फुर्सत नहीं है हड़ताल कौन खत्म कराएं, उच्च प्रशासनिक अधिकारी इस लफड़े में नहीं पड़ना चाहते वे जानते हैं कि राज्य में उच्च स्तर पर कोई बड़ा फेरबदल हो सकता है ऐसे में दो पाटों के बीच कौन फंसे आम जनता है ना दो पाटों के बीच पीसने के लिए।