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अब कांग्रेस के एक खेमे ने उठाई आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग
- By 24hnbc --
- Thursday, 02 Sep, 2021
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समाचार - छत्तीसगढ़ / बिलासपुर
बिलासपुर । छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी दल कांग्रेस की राजनीति में इन दिनों दुविधा की स्थिति देखी जा रही है। बड़े नामचीन नेता यहां तक कि कैबिनेट मंत्री भी अपनी पक्षधरता को लेकर तटस्थ हो रहे हैं 2 सितंबर को जब राज्य के मुख्यमंत्री मरवाही विधानसभा क्षेत्र और अमरकंटक के दौरे पर रहे तो उनके साथ अट्ठारह विधायक तो थे किंतु प्रभारी मंत्री कोरबा विधायक जयसिंह अग्रवाल नहीं थे इसके पहले जब मुख्यमंत्री दिल्ली में अपनी परीक्षा दे रहे थे तब दर्जनों विधायक मंत्री तो दिल्ली में डटे थे किंतु कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मरवाही में थे उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ दिल्ली ना जाना कर स्वयं को तटस्थ कर लिया इन सब बातों से संकेत मिल रहा है कि उच्च स्तर पर कुछ ना कुछ परिवर्तन तो होगा ऐसे में परिवर्तन के पहले क्या कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी छत्तीसगढ़ आएंगे...? इस बात की संभावना कम ही लगती है साथ में एक बात और जब प्रदेश की मुख्यमंत्री प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया की बैठक श्री राहुल के आवास पर हुई थी और उस मीटिंग में बताया जाता है कि प्रियंका गांधी भी शामिल हुई थी तो असल में बैठक कितने मिनट चली क्योंकि स्वयं मुख्यमंत्री ने जितने वाक्य बैठक के बाद बाहर आकर पत्रकारों बताएं यदि बैठक लंबी चली होती तो पत्रकारों से चर्चा भी इससे लंबी होती अब कांग्रेसी हलकों में ही यह चर्चा चल रही है कि जब पार्टी की सत्ता में वापसी आदिवासी सीटों पर भरपूर समर्थन से हुई तो क्या मुख्यमंत्री इसी वर्ग से नहीं आना चाहिए हालांकि यह बात किस खेमे से उठी है । जिस किसी भी मुख्यमंत्री को बदला जाता है उससे उसकी मुख्यमंत्री के रूप में पसंद पूछी ही जाती है और यथासंभव मानी भी जाती है ऐसे में छत्तीसगढ़ में क्या यह परंपरा कायम रहेगी. ..? सबसे बड़ी बात 2001 में हाईकमान की इच्छा को लागू कराने की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को मिली थी इस बार यदि छत्तीसगढ़ में कोई मुख्यमंत्री परिवर्तन होता है तो हाईकमान की इच्छा को कौन पूरा कर आएगा । गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह इन दिनों राष्ट्रीय मुद्दों पर आंदोलन की रणनीति बनाने वाली उप समिति के अध्यक्ष बनाए गए और छत्तीसगढ़ की राजनीति में उनकी पकड़ का कोई सानी नहीं है।


