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भाजपा न मैदान की न जंगल की, बस्तर चिंतन से जनता को मिला संदेश
- By 24hnbc --
- Thursday, 02 Sep, 2021
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समाचार - छत्तीसगढ़ / बिलासपुर
बिलासपुर। भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं ने बस्तर चिंतन शिविर में जो कुछ भी किया उसी से जो बातें छनकर बाहर आई वे इस बात का संकेत देती है कि प्रदेश भाजपा में अभी भी बहुत कुछ ठीक नहीं चल रहा है । नंबर एक प्रदेश भाजपा का आर एस एस के साथ संवाद ठीक नहीं है इसे खुले शब्दों में कहें संवाद है ही नहीं तभी तो भाजपा के चिंतन शिविर में आर एस एस के दो लोगों को बुलाया गया था किंतु कोई नहीं गया शायद इसी नाराजगी के चलते भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष चिंतन शिविर के बाद आर एस एस क्षेत्रीय कार्यालय गए दीपक विस्फूटे से मुलाकात की। दूसरा भाजपा के प्रदेश स्तरीय नेताओं को अब अपने ऊपर ही भरोसा नहीं है तभी तो वह राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन करने के लिए केंद्र से बड़े नेता मांग रहे हैं। 15 साल सत्ता में रहे किंतु कार्यकर्ताओं से इतना दूर होते गए कि अब अपने ही राज्य में अपनी ही नेतागिरी चमकाने के लिए केंद्र से आयातित नेता पर भरोसा करना पड़ रहा है ऐसी बेहाली भाजपा की पहले नहीं हुई। तीसरा चिंतन शिविर बस्तर के जंगल में रखा गया भाजपा के जो नेता वहां गए या बुलाए गए वह सब वानप्रस्थी ही है भाजपा जिस सनातन परंपरा की बात करती है उसके अनुसार जितने नेता मंच पर चिंतन कर रहे थे वह सब सांसारिक जीवन की आयु वर्ग से बाहर हो चुके हैं संगीत की जिस थाप पर वे नाचे वह सन्यास का आनंद है लगता है कि उन सबके मार्गदर्शक मंडल में जाने का उत्सव वह स्वयं ही मना रहे हैं। चौथा छत्तीसगढ़ की प्रभारी डी पुरंदेश्वरी ने जिस भरोसे के साथ कार्यकर्ता की थूक में सत्ताधारी दल के बह जाने की बात कही उन्हें याद रखना चाहिए कि उनकी पार्टी में मिस कॉल देकर सदस्य बनाने की परंपरा रही है ऐसे में जब थुकने की बारी आएगी तो कौन आएगा..?
भाजपा बस्तर के जिस क्षेत्र में चिंतन कर रही है वहीं से पूरी तरह नकारी गई अब जहां पूछपरख थी वहां पर अपने मतदाताओं की चिंता नहीं हुई उल्टे जहां से दुत्कारा गया वहां पर जाकर चिंतन हुआ परिणाम न यह खुश न वह खुश ऐसे में 2023 अबकी बार 72 पार का नारा उठाकर सोए हुए कार्यकर्ताओं को कौन उठाएगा।


