No icon

24hnbc

सक्ति से मिल रही शक्ति हालिया दिल्ली एपिसोड का सूत्रधार कौन ?

24hnbc.com
समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । ढाई ढाई का कोई फार्मूला नहीं था यह बात छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कैबिनेट मंत्री दो नंबर की राजनीतिक हैसियत वाले टीएस सिंह देव ने स्वयं स्वीकार की है। ऐसे में अब यह खोजा जा रहा है कि ढाई ढाई साल के फार्मूले को ढाई साल तक बार बार शक्ति कहां से मिलती रही यदि झीरम नहीं हुआ होता तो भूपेश बघेल, टीएस सिंह देव और ताम्रध्वज साहू जैसे नेता शक्ति केंद्र बनने के बहुत पीछे होते क्योंकि वैसे में नंद कुमार पटेल, महेंद्र कर्मा का कद बहुत ऊपर होता। झीरम ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के फ्रंटलाइन को पूरी तरह समाप्त कर दिया था उसके बाद ही भूपेश बघेल का प्रदेश अध्यक्ष बनने का नंबर लगा आज छत्तीसगढ़ में कोई भी ऐसा वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नहीं है जिसके कहने से अन्य नेता अपने काम का तौर तरीका बदल दे, मोतीलाल के प्रस्थान कर जाने के बाद ऐसा कोई नाम नहीं है जिसकी बात छत्तीसगढ़ के कांग्रेसी नेता सुनते हैं यदि आज हाईकमान छत्तीसगढ़ के नेतृत्व में परिवर्तन पर विचार भी करता है तो यह बात तय है कि नेतृत्व बदलकर टीएस सिंह देव के पास नहीं जाएगा । भूपेश बघेल वर्तमान मुख्यमंत्री न तो कमजोर थे ना हैं ऐसे में उनकी राय अति महत्वपूर्ण है। राजनैतिक अनुभवी यह कहते हैं कि दो की लड़ाई में तीसरे का फायदा आम बात है। ऐसे में पुराने अनुभवी सक्ति विधानसभा से विधानसभा अध्यक्ष बने महंत अचानक प्रासंगिक हो गए हैं वे लंबे समय मध्य प्रदेश कांग्रेस सरकार के हिस्सा रहे केंद्र में कृषि राज्य मंत्री रहे एक से अधिक बार सांसद रहे छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व ऐसे समय किए जब अजीत जोगी किसी अन्य को चैन से राजनीति नहीं करने देते थे । छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़िया किसान का बेटा मुख्यमंत्री बनता है तभी आम नागरिकों को बात गले उतरती है और मुख्यमंत्री मुझ किसान के बेटे को मुख्यमंत्री पद मिला यह हाईकमान की कृपा है ऐसा कह के आम जनता को संतुष्ट किया जाता है फिर महल के दबाव के सामने तो राहुल गांधी वैसे भी झुकना पसंद नहीं करते यदि दबाव पर झुकना होता तो सिंधिया का दबाव बाबा से ज्यादा था।