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मैदान के बाहर से खेल कर बाबा चाहते हैं जीतना

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य की कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कैबिनेट मंत्री टीएस सिंह देव प्यारा नाम बाबा के बीच इन दिनों गजब का खेल चल रहा है । खेल की भाषा में कहें तो इन दोनों खिलाड़ियों में से एक टीएस सिंह देव अपने ही तरीके से खेल में शामिल हैं वह कुछ पाना तो चाहते हैं किंतु मैदान के बाहर से
इसे इस तरह समझे पंजाब की कांग्रेस सरकार में नवजोत सिंह सिद्धू कैबिनेट मंत्री थे और उनके कप्तान अमरिंदर सिंह थे सिद्धू को मंत्री पद से संतुष्टि नहीं थी और उससे बड़ा कुछ पाना था तो उन्होंने पहले जो था उससे मुक्ति पाई मैदान में डटे और वक्त का इंतजार किया समय पर पवेलियन से बाहर निकले खुलकर बैटिंग की विकेटकीपिंग की, बल्लेबाजी की, क्षेत्ररक्षण भी किया और अपने आलाकमान को यह बता दिया कि वह टीम के लिए कितने उपयोगी हैं बदले में अब सिद्धू प्रदेश अध्यक्ष हैं हालांकि छत्तीसगढ़ के चुनाव में अभी लंबा वक्त है किंतु छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार के पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल को ढाई साल से अधिक हो गया है राजनीतिक गलियारों में सरकार बनने के बाद से ही ढाई ढाई साल के फार्मूले की चर्चा होती रहती थी इस ढाई ढाई साल के ट्विस्ट को समझना जरूरी है जब कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में ताबड़तोड़ बहुमत प्राप्त हुआ और छत्तीसगढ़ के प्रमुख नेता दिल्ली में डेरा डाले तब 4 नाम चर्चित थे पहला भूपेश बघेल दूसरा ताम्रध्वज साहू, चरण दास महंत और टीएस सिंह देव एक मौका आया जब दुर्ग जिले के निवासी सांसद ताम्रध्वज साहू का नाम छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में लगभग तय हो गया उनके आवास पर पटाखे चल पड़े उसके बाद ऐसा क्या हुआ की श्री साहू के नाम की घोषणा टल गई जानकार बताते हैं कि साहू जी के मुख्यमंत्री बनने पर सिंह देव और भूपेश दोनों राजी नहीं थे दोनों ने एक साथ मिलकर उस समय के पार्टी अध्यक्ष को अपनी राय बता दी और सीएम हम 2 में से किसी को भी बना दो शेष नाम मंजूर नहीं होगा इसी के बाद एक बार फिर बैठक हुई और चार नेताओं का प्रोटोकॉल एक साथ दिल्ली से तय हुआ मुख्यमंत्री पद भूपेश बघेल के हाथ लगा विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर महंत बने टीएस सिंह देव तथा ताम्रध्वज साहू को कैबिनेट में बड़े पद मिले इन्हें छत्तीसगढ़ में सीएम के बाद नंबर दो माना जाता था। बहुमत इतना बड़ा है कि सत्ता परिवर्तन नहीं हो सकता है लिहाजा कांग्रेस की परंपरा के अनुसार समय-समय पर समाचार और कौशिप छपते रहे विशेषकर जब कभी भी कोई भी प्रभावशाली मंत्री अथवा नेता बिलासपुर आया तब उससे मुख्यमंत्री कौन होगा क्या बदलाव होगा क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक चल रहा है जैसे प्रश्न आदतन पूछे जाते हैं पत्रकारों को इस बात से कोई सरोकार नहीं कि छत्तीसगढ़ राज्य के सभी कैबिनेट मंत्री जी ने जिस विभाग की जिम्मेदारी दी गई है वह अपनी ही पार्टी के घोषणापत्र को कैसे लागू कर रहे हैं कौन मंत्री अपने विभाग के काम में कितना माहिर है वह प्रशासनिक दृष्टि से अधिकारियों पर हावी है या नौकरशाह मंत्री पर हावी हैं इन प्रश्नों पर कोई चर्चा नहीं करता ढाई साल बीत जाने के बाद आज तक किसी भी स्तर पर न तो यूनिट टेस्ट हुआ ना कॉपी जजी छमाही हुई न वार्षिक परीक्षा न प्रैक्टिकल हुआ वायवा जिस तरह बोर्ड परीक्षा में घर से पर्चा लिखकर सब पास हो गए वैसा ही मंत्रिमंडल में चल रहा है। सरकार को मुखिया को यह समझना होगा कि एक दिन अंतिम मूल्यांकन के लिए जनता के पास ही जाना है और वहां पर बिना तैयारी के परीक्षा में बैठना और अनुत्रिन हो जाना स्वभाविक होगा ऐसे में मुखिया को चाहिए कि वह दिल्ली हाईकमान के पास वायवा पास करने के बाद छत्तीसगढ़ के मतदाता के पास किस तैयारी से जाना है पर ध्यान दें क्योंकि असली मूल्यांकन तो चुनाव के मैदान में ही होगा।