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डॉक्टर रमन ने पत्रकारों को दी सलाह क्या पूछे भूपेश से

महंगाई पर पत्रकारों ने पूर्व मुख्यमंत्री से किए तीखे सवाल

24 HNBC (बिलासपुर  ) 
बिलासपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने आज 25 जून को, 1976 में लगाई गई आपातकाल की घोषणा को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताते हुए उन राष्ट्रीय नेताओं की भूरी-भूरी प्रशंसा की जिन्होंने उस समय अपने व्यक्तिगत हितों को दूर रख कर देश हित में जेल यात्राएं की और भारत में लोकतंत्र को दोबारा जीवित किया । डॉक्टर रमन ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे हो जाने पर भूपेश सरकार को इस बात के लिए दोषी ठहराया की उनके कारण राज्य सरकार दिवालिया हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को सलाह दी कि वह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से क्या क्या पूछा करें।
डॉक्टर रमन ने केंद्र सरकार की नीतियों को भला बताया, अच्छा बताया और राज्य सरकार की आलोचना की उन्होंने लगभग 20 मिनट लंबा वक्तव्य दिया किंतु पत्रकारों के सवाल जवाब के लिए 10 मिनट से भी कम समय दिया। पत्रकारों के प्रश्न पर उन्होंने गोल गोल जवाब दिया राज्य की आर्थिक बर्बादी पर जब उनसे यह पूछा गया कि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के अंतिम वृत्तीय वर्ष में राज्य का स्थापना खर्च कितना था और 2003 में जब उन्होंने सत्ता संभाली तब कितना था तो उन्होंने कहा कि स्थापना खर्च बढ़ जाने से कुछ नहीं होता विकास कार्य के लिए खर्च होना चाहिए। जबकि वक्तव्य में वे राज्य सरकार के कुल व्यय और विकास कार्य पर खर्च की जा रही राशि का तुलनात्मक विवरण दे रहे थे। महंगाई पर उन्होंने पेट्रोल, डीजल की कीमतों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ा जब पत्रकारों ने उन्हें बताया कि अब तो मिर्ची का तीखापन खाकर नहीं कीमत सुनकर ही पता चल जाता है तो उन्होंने बाजार में मुनाफाखोरी की बात कही, उन्होंने सीमेंट के रेट बढ़ने पर भूपेश सरकार की नीति को दोषी ठहराया किंतु खाद्य तेलों के रेट कैसे बढे़ का जवाब नहीं दिया। बस्तर सिलेगर ग्राम में नागरिकों द्वारा सुरक्षा बलों के कैंप को हटाने की मांग पर जब उनसे पूछा गया कि भारतीय जनता पार्टी किस तरफ है तब उन्होंने कहा कि आम जनता को समझाने बुझाने का काम राज्य सरकार का है और सुरक्षाबलों के कैंप नक्सलवाद से निपटने के लिए जरूरी है ।