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प्रभारी मंत्री बदलना समस्या का निदान या प्रारंभ

24 HNBC  ( बिलासपुर  ) 
 
बिलासपुर । छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद दूसरे नंबर के शहर का दर्जा रखने वाले बिलासपुर कि अब स्थिति और नीचे चली गई पहले राज्य सरकार ने दो नंबर की स्थिति रखने वाले कैबिनेट मंत्री ताम्रध्वज साहू यहां के प्रभारी मंत्री थे। उन्हें हटाकर अब यह प्रभाव आपदा प्रबंधन राजस्व मंत्री जयसिंह को मिला है, यदि यही प्रभार स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव को मिला होता तब ऐसा लगता कि बिलासपुर शहर का प्रोटोकॉल राजनैतिक स्तर पर दो नंबर पर है, किंतु सीएम का विशेषाधिकार है किसी भी मंत्री को जिले का प्रभारी मंत्री बनाया जा सकता है जयसिंह के चयन के बाद एक बात तो पक्की हो गई कि मुख्यमंत्री ने बिलासपुर के पूर्व विधायक अमर अग्रवाल के उस कथन की बिलासपुर भू माफिया की राजधानी बन गई है पर तगड़ा प्रहार किया है। उन्होंने तो राजस्व विभाग के मंत्री को ही बिलासपुर जिले का प्रभारी मंत्री बना दिया है, ऐसा कहा जाता है कि जिस रोग से शहर त्रस्त हो उसी के विशेषज्ञ डॉक्टर को वहां की कमान दे देना चाहिए इस लिहाज से कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री का निर्णय उचित है क्योंकि बिलासपुर में आम जनता सबसे अधिक यदि किसी विभाग से त्रस्त है तो उस विभाग का नाम राजस्व ही है। तहसील, अनुविभागीय दंडाधिकारीयों के कार्यालय, पटवारी कार्यालय आम जनता जब कभी भी इन दफ्तरों में चक्कर काटती है तो उसे साधारण नामांतरण प्रकरण में भी कम से कम 1 साल लगता है। ऐसे में उसी विभाग का मंत्री जब प्रभारी मंत्री होगा तो शायद नागरिकों को कुछ राहत मिले वैसे राजस्व मंत्री के प्रभारी मंत्री बनकर बिलासपुर आगमन पर जो विज्ञापन की ताबड़तोड़ बारिश हुई है उसे लगता है कि शहर का हर जमीनी कांग्रेसी आदमी नेता बड़ा खुश है। दवाई विक्रेता से लेकर मिठाई दुकान वाले तक और पूर्व प्राधिकरण के अध्यक्ष भी बड़े खुश नजर आ रहे हैं, क्योंकि यह पूरी बाहरी लाबी केवल जमीनी काम ही करती है बाकी काम तो दिखावे के हैं। इसके अतिरिक्त प्रभारी मंत्री बदल जाने से एक बात और निश्चित हो गई कि जिले में कांग्रेस अब और गुटों में बैठेगी वैसे वर्चस्व की दृष्टि से देखा जाए तो संभाग बिलासपुर अब पूरी तरह से महंत गुट के कब्जे में है। जांजगीर जिले में स्वयं स्पीकर बैठे हैं कोरबा संसदीय क्षेत्र में उनकी श्रीमती सांसद है और वहीं पर उनके विधायक जयसिंह अग्रवाल हैं। संसदीय क्षेत्र कोरबा गौरेला पेंड्रा मरवाही तक अपनी सीमा रखता है और उसके बाद बिलासपुर जिला प्रारंभ होता है जिसकी कमान जयसिंह अग्रवाल जी को दी गई है इस तरह संभाग पूरी तरह से महंत गुट के पास चला गया, अब शहर में नेता अपनी अपनी टीम के कप्तान बनते दिखेंगे और विज्ञापन भी कांग्रेस का नहीं संगठन का नहीं टीम और उनके कप्तानों का लगेगा। वैसे भी राज्य के सर्वाधिक भ्रष्ट 90 अधिकारियों में से 35 अधिकारी बिलासपुर में हैं ऐसे में जिले के अंदर अब विज्ञापन की कमी नहीं होनी चाहिए।