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असम का परिणाम चाहे जो हो छत्तीसगढ़ में होगा कलह

24 HNBC. बिलासपुर

बिलासपुर। असम का चुनाव परिणाम चाहे कुछ हो छत्तीसगढ़ में इस कारण राजनैतक उथल-पुथल होगी कारण दो है। पहला असम चुनाव के लिए कांग्रेस का घोषणा पत्र और दूसरा कांग्रेस की राजनीति में छत्तीसगढ़ के सीएम का बढ़ता प्रभाव आज सिर्फ पहले बिंदु पर चर्चा करेंगे जिसका सीधा संबंध समाज के आधी जनसंख्या से है। 

              कांग्रेस ने असम घोषणा पत्र में यह वादा किया है कि चाय बागान के मजदूरों को प्रतिदिन 365 रुपए पारिश्रमिक मिलेगा यदि वे सत्ता में आए। अब जब कभी भी इस घोषणापत्र को छत्तीसगढ़ की आम जनता पड़ेगी उसे सबसे पहले इस बात का जवाब चाहिए होगा की छत्तीसगढ़ के लाखों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कांग्रेस की भूपेश सरकार मानदेय में कटौती क्यों करती है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बन कर आई और इसके पीछे घोषणा पत्र समिति की व्यू रचना का बड़ा हाथ है । उस वक्त टी एस सिंहदेव ने गली-गली, पारा-पारा, हाट बाजार, मजरा टोला में घुटनों के बल बैठ-बैठ कर जनता की राय से घोषणा पत्र तैयार किया। उस वक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से यह वादा हुआ कि केंद्र सरकार के द्वारा मिलने वाले मानदेय पर 2500 रुपए अतिरिक्त मिलेगा। यह धनराशि इतनी बड़ी नहीं थी कि नहीं दी जा सके । किंतु दो वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तारीख तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को यह धनराशि प्राप्त नहीं होती है। ऐसे में दूसरे राज्य के चुनाव में जब यही राजनैतिक दल चाय बागान मजदूरों को 365 रुपए प्रतिदिन देने की बात करता हो तो यह जानना जरूरी है कि चाय बागान के मजदूर संख्या में कम है या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता निश्चित ही आंगनबाड़ी के कार्यकर्ताओं की संख्या कम है। अब इसी में एक सवाल और जोड़ता है चाय बागान का मजदूर यदि 365 रुपए प्रतिदिन का पात्र है तो खेतिहर मजदूर के ऊपर यही फार्मूला लागू क्यों ना हो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ का विपक्षी राजनीतिक दल इस मुद्दे को लेकर निश्चित ही बड़ी बहस छेड़ सकते है जिसे कांग्रेस के एक गुट से भी साथ प्राप्त होगा।