परिणाम राहुल का संबंध चुनाव परिणाम से
24HNBC सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्य समिति की पिछली बैठक में अध्यक्ष पद का चुनाव मई तक टलवा दिया। पिछले साल अगस्त में जब कांग्रेस के 23 असंतुष्ट नेताओं ने चिट्ठी लिखी थी और हर पद के लिए चुनाव कराने की मांग की थी तब तय हुआ था कि छह महीने में चुनाव होंगे। लेकिन बाद में पांच राज्यों के चुनावों के बहाने अध्यक्ष का चुनाव टाल दिया गया। कांग्रेस नेतृत्व को अंदाजा था कि इन पांच राज्यों में कांग्रेस के लिए अच्छे नतीजे आ सकते हैं। तमिलनाडु में डीएमके के साथ सरकार बन जाएगी और केरल में पांच साल बाद सत्ता बदलती है तो वहां भी कांग्रेस की सरकार बन जाएगी। पुड्डुचेरी में उस समय तक कांग्रेस के विधायक एकजुट थे तो वहां भी कांग्रेस को सरकार में वापसी की उम्मीद थी। इसके साथ ही यह भी अंदाजा था कि पांचों राज्यों में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहने वाला है। तभी कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव पांच राज्यों के चुनाव नतीजों तक टाला गया था।गांधी-नेहरू परिवार के करीबी नेताओं का मानना था कि चुनाव नतीजों के बाद राहुल गांधी को निर्विरोध अध्यक्ष बनाना आसान हो जाएगा। लेकिन सवाल है कि अगर नतीजे मन लायक नहीं आए तो क्या होगा? जिस समय कांग्रेस ने मई-जून में चुनाव कराने का फैसला किया था उस समय तक केरल में कांग्रेस के अनुकूल हालात थे पर अब वहां लेफ्ट की वापसी का अनुमान लगाया जा रहा है और पुड्डुचेरी में कांग्रेस की सरकार चुनाव से पहले ही चली गई है। सो, अगर चुनाव नतीजे अच्छे नहीं आते हैं तो राहुल गांधी के निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने की राह मुश्किल हो जाएगी। फिर कांग्रेस नेतृत्व को प्लान बी पर काम करना होगा। हालांकि प्लान बी के तहत किसी दूसरे भरोसेमंद नेता को चुनाव लड़ा कर जिताना भी आसान नहीं होगा क्योंकि असंतुष्ट नेताओं की जमात उसके सामने ज्यादा बड़ी चुनौती खड़ी कर सकती है। यह कांग्रेस के लिए कैच-22 की स्थिति है।


