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बंगाल के टूट रहा बीजेपी का अनुशासन

 

 

24HNBC पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों के तीसरे और चौथे चरण के लिए बीजेपी ने रविवार रात को जब अपने उम्मीदवारों की सूची जारी तो राजनीतिक हलकों में काफी हैरत हुई.इसकी वजह यह थी कि इस सूची में चार सांसदों- लॉकेट चटर्जी, बाबुल सुप्रियो, स्वपन दासगुप्ता और निशीथ प्रामाणिक के नाम भी शामिल थे.उसके बाद से ही राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि इन सांसदों को विधानसभा चुनावों में उतारना बीजेपी का मास्टर स्ट्रोक है या मजबूरी?बीजेपी के प्रदेश नेता जहां इसे पार्टी की रणनीति बता रहे हैं, वहीं टीएमसी इसे उसकी मजबूरी बता रही है.सत्तारूढ़ पार्टी का आरोप है कि उसके पास योग्य उम्मीदवारों का भारी टोटा है.यही वजह है कि उसे चार-चार सांसदों को भी मैदान में उतारना पड़ा है. बीजेपी की सूची में बांग्ला फ़िल्म जगत के चार सितारे भी हैं.दूसरी ओर, टीएमसी की सूची में सिर्फ एक सांसद मानस भुइंया का ही नाम है.बीजेपी की सूची में फिल्मी सितारों के अलावा हाल में टीएमसी से आने वाले ज्यादातर नेताओं को भी टिकट दिया गया है.वैसे, उम्मीदवारों की सूची जारी होने से पहले प्रदेश बीजेपी के नेता लगातार दावे कर रहे थे कि सांसदों को विधानसभा चुनाव में मैदान में उतारने की कोई संभावना नहीं है.पश्चिम मेदिनीपुर जिले में खड़गपुर सदर सीट पर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष और सांसद दिलीप घोष के मैदान में उतरने की चर्चा थी.लेकिन जब वहां से उनको टिकट नहीं मिला तो यह दावा सही साबित होता नजर आने लगा था.लेकिन नई सूची में सांसदों को टिकट देने के बाद कयासों का दौर तेज हो गया है.जिन चार सांसदों के नाम इस सूची में हैं, उनमें से तीन—बाबुल सुप्रियो, लॉकेट चटर्जी और स्वपन दासगुप्ता ने कहा है कि पार्टी ने उनको उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है तो वे उसका पालन करेंगे.राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता हुगली ज़िले की तारकेश्वर, लॉकेट चटर्जी इसी जिले के चुंचुड़ा और निशीथ प्राणिक कूचबिहार जिले की दिनहाटा सीट से चुनाव लड़ेंगे.आसनसोल सीट से दो बार लोकसभा चुनाव जीत कर केंद्र में मंत्री बनने वाले बाबुल सुप्रियो की टालीगंज विधानसभा सीट से उम्मीदवारी का फैसला सबसे हैरत भरा रहा है.बीजेपी के एक नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, बांग्ला फिल्मोद्योग टॉलीवुड इसी इलाके में है. इसे ध्यान में रखते हुए ही बाबुल सुप्रियो को वहां टिकट दिया गया है.हालांकि बीजेपी का एक गुट ही इस दलील को मानने के लिए तैयार नहीं है. इस गुट की दलील है कि टॉलीगंज में फिल्म जगत से जुड़े लोगों के अलावा भी काफी वोटर हैं.इसके अलावा वहां स्थित स्टूडियो में काम करने वालों में बड़ी तादाद ऐसे लोगों की है जो उस इलाके के वोटर नहीं हैं.लेकिन केंद्रीय मंत्री और बीजेपी की महिला नेता देवश्री चौधरी कहती हैं, "सांसदों को विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने के पीछे कोई ऐसा कारण नहीं है. बंगाल में बीजेपी ही अगली सरकार का गठन करेगी. जिन लोगों ने राज्य के पुनर्गठन में सहयोग देने की इच्छा जताई थी उनको टिकट दिया गया है."राजनीतिक विश्लेषक समीरन पाल कहते हैं, "दरअसल बीते कुछ दिनों से ममता बनर्जी के नंदीग्राम के अलावा टॉलीगंज सीट से भी लड़ने के कयास लग रहे हैं. शायद इसी को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने उनके खिलाफ यहां भी हैवीवेट उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है ताकि बाबुल की लोकप्रियता के आधार पर यहां भी ममता को घेरा जा सके."वैसे, टीएमसी ने उम्मीदवारों की जो सूची घोषित की है उसके मुताबिक टॉलीगंज सीट पर वर्ष 2011 और 2016 में चुनाव जीतने वाले अरूप विश्वास, जो मंत्री भी हैं, को ही उम्मीदवार बनाया गया है.इस सीट के लिए मतदान 10 अप्रैल को होना है और नामांकन की आख़िरी तारीख 23 मार्च है.उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद कई जगह उन नेताओं और उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया है.कोलकाता नगर निगम के मेयर और ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रहे शोभन चटर्जी समेत कम से कम तीन नेताओं ने तो पार्टी छोड़ने का एलान कर दिया है.सिंगूर में टीएमसी के निवर्तमान टीएमसी विधायक रबींद्रनाथ भट्टाचार्य की उम्मीदवारी के खिलाफ भी स्थानीय नेता लगातार विरोध जता रहे हैं.बीजेपी की सिंगूर शाखा के उपाध्यक्ष संजय पांडे कहते हैं, "रबींद्रनाथ उर्फ मास्टर मोशाय ने सीधे केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क कर पार्टी ज्वॉइन की थी. हमने इसे भी स्वीकार कर लिया. लेकिन अब उनको उम्मीदवार बनाना हमें मंजूर नहीं है. उनकी उम्र 89 साल है जबकि पार्टी अस्सी से ऊपर वालों को टिकट नहीं देने की बात कहती रही है. क्या वे लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से भी बड़े कद के नेता हैं?"दूसरी ओर, बीजेपी के जिला अध्यक्ष गौतम चटर्जी दावा करते हैं, "टीएमसी हमारे कुछ लोगों को भड़का कर यह सब करा रही है."इसी तरह चुंचुड़ा में भी लॉकेट चटर्जी की उम्मीदवारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं. वहां जिन सुबीर नाग का नाम उम्मीदवारी की होड़ में सबसे ऊपर था उन्होंने तो राजनीति से ही संन्यास ले लिया है.