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छत्तीसगढ़ प्रदेश की दोनों राजनीतिक पार्टियों में अंदरूनी कलह

बिलासपुर 24 hnbc. 

 

प्रदेश के निर्वाचित जनप्रतिनिधि इन दिनों एक दूसरे के राजनीतिक पार्टी की अंतः कलह की बात कर रहे हैं और आम जनता की परेशानियों पर राहत का मरहम नहीं लगा रहे हैं नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कल अपने पत्रकार वार्ता में सीएम और स्वास्थ्य मंत्री के बीच की कलह की बात की वही कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं के बीच कलह की बात कही थी राजनैतिक दलों के अंदर नेताओं की प्रतिस्पर्धा कब कलह में बदल जाती है यह कोई नहीं जानता सबसे पहले आंतरिक कलह दूसरे राजनीतिक दल को दिखाई देती है और वह मजे लेकर पत्रकारों को बताता है कि उस राजनीतिक दल में अंतः कलह चल रही है किसी राजनीतिक दल के अंतः कलह का मजा दूसरा राजनीतिक दल ही सबसे पहले लेता है और यह भी कहता है कि वह उसका अंदरूनी मामला है हमें इससे क्या छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक कलह अब जग जाहिर है। पार्टी नहीं युवा मोर्चे का संगठनात्मक ढांचा खड़ा किया और 35 ब्लो का मामला सिरदर्द बना आखिर प्रदेश प्रभारी ने निर्देश दिया कि जितने लोगों को पद दिया गया है वह सब अपनी अंकसूची के साथ दस्तावेज जमा कराएं जिससे यह तथ्य पता चले कि असल में 35 का फार्मूला पालन किया गया कि नहीं । बड़े नेताओं का खटपट सब जान रहे हैं अजय चंद्राकर और बिल्हा के भूपेंद्र सवन्नी का विवाद आमने-सामने हैं जब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी तब सवन्नी का तार सीधे पीएमओ से जुड़ा था वह प्रधानमंत्री की चुनावी रैली के लिए इंतजाम अली थे और आज पूर्व मंत्री भी उनके साथ मंच पर झगड़ा कर लेते हैं । प्रदेश भाजपा में इन दिनों जिनके पास पद है वह पूर्व मंत्रियों से गिन गिन कर हिसाब ले रहे हैं यही कारण है कि बिलासपुर के अमर अग्रवाल को पार्टी कार्यक्रमों में कम देखा जाता है यहां तक की बजट जैसे विषय पर भी उन्हें बिलासपुर से दूर दूसरे स्थान पर बोलने कहा गया और बिलासपुर में यह जिम्मेदारी नेता प्रतिपक्ष को दे दी गई शायद यही कारण है कि कल के पत्रकार वार्ता में पत्रकारों ने नेता प्रतिपक्ष को जमकर घेरा और पत्रकार वार्ता नेताजी के लिए उल्टी पड़ी। भारतीय जनता पार्टी को अनुशासित कार्यकर्ताओं के लिए जाना जाता है किंतु बड़े नेताओं की खटपट से यह तमगा अब छीनता नजर आ रहा है पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह की टीम और भाजपा के बीच की लड़ाई स्पष्ट नजर आती है दूसरी ओर कांग्रेस की अंतः कलह से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वह तो कांग्रेस का मिजाज और यदि मिजाज ही खत्म हो जाएगा तो फिर कांग्रेस कैसे रहेगी सो जनता को भाजपा के अंत: कलह में में ज्यादा रुचि है।