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दिल्ली दरबार के वजह से चरमराती छत्तीसगढ़ की भाजपा

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बिलासपुर, 31 अगस्त 2023। 
छत्तीसगढ़ की राजनीति में कांग्रेस बीजेपी दोनों राजनीतिक दलों में इस समय बैठकों का दौर जारी है। अब तो रक्षाबंधन से लेकर जन्माष्टमी, तीजा, गणेश चतुर्थी को छोड़कर दीपावली के दीप की लौ में भी राजनीति के रंग दिखाई देंगे। एक तरफ कांग्रेस के बड़े नेता मुख्यमंत्री पार्टी अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी, विधानसभा स्तरीय संकल्प शिविर में भाजपा को लक्ष्य कर के भाषण दे रहे हैं, कार्यकर्ताओं को बता रहे हैं की किस-किस मुद्दे पर किस तरह मतदाताओं को समझता है। प्रदेश में राज्य सरकार के द्वारा लागू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देनी है और भारतीय जनता पार्टी के कारनामों को उजागर करना है। वही भारतीय जनता पार्टी के राज्य स्तरीय नेताओं में जोश भरने के लिए बार-बार केंद्रीय गृहमंत्री को आना पड़ रहा है यह स्थिति 2003 के चुनाव के समान हैं। भाजपा के स्थानीय नेताओं को अप्रवासी विधायकों से फुर्सत ही नहीं मिल रही है। मेहमान विधायकों को अप्रवासी शब्द भाजपा कार्यालय ने ही दिया है। ऐसे में भाजपा के कार्यकर्ता ही जब मेहमान विधायक को अप्रवासी समझलें तो अप्रवासी का उद्देश्य और उसकी सफलता संदिग्ध हो जाती है। पार्टी कार्यकर्ता को ही संदेह हो जाएगा तो मतदाता अप्रवासी पर भरोसा क्यों करेगा। ठीक एक दिन बाद कांग्रेस पार्टी के विभिन्न स्तर पर प्राप्त प्रत्याशी आवेदन पत्रों पर विचार विमर्श शुरू हो जाएगा। कौन किसके लिए खुली मदद कर रहा है, कौन गुप्त मदद कर रहा है कि बैठक छत्तीसगढ़ भवन के एसी कमरे से लेकर पार्टी पदाधिकारी के घर तक पर चल रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश कार्यालय से पदाधिकारी की एक सूची रोज जारी हो रही है। सूची में जो नए नाम जुड़ रहे हैं मैदान में उनके कहने से मतदाता वोट नहीं देता आश्चर्य जनक बात यह है कि इनमें से कुछ पदाधिकारी कांग्रेस के घोषित उम्मीदवारों के खिलाफ स्वयं चुनाव लड़कर देख चुके हैं और चुनाव में उन्हें चार अंक में भी वोट प्राप्त नहीं हुए। ऐसे में इतने कम जनधार वाले नेता को संगठन में बड़ा पद नाम देखने में श्याम सुंदर असल में ----------।