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स्मृति से जोशी तक शिक्षा और स्वास्थ्य जा रही गर्त में

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बिलासपुर, 27 जुलाई 2026। 
भारत ने बैड (बुरी) सरकारी अच्छी है लेकिन वर्तमान की सरकार दुष्ट, क्रूर, नीच सरकार है। जंतर मंतर का आंदोलन तो समाप्त हो गया पर वहां पर महिलाओं ने भी जिस तरह से देश के प्रधानमंत्री जो अपने को प्रधान सेवक कहते हैं को जितनी गालियां पड़ी उतनी गालियां कभी भी भारत के 14 प्रधानमंत्री को नहीं पड़ी। वास्तविकता यह है कि ये गलियां हिंदू समाज ने ही दी कारण पिछले 12 सालों में इन्होंने झूठ पड़ोसा, लोगों को बेवकूफ बनाया, जुमले बाटे और अंत में तो हिंदू राष्ट्र बनाते-बनाते बहुसंख्यक को कॉकरोच बना दिया। हमें याद है इन्हीं के सरकार के एक मंत्री डार्विन के विकासवाद की हंसी उड़ाते थे। कहते थे मेरे पूर्वज तो बंदर नहीं थे वे मनुष्य थे तो हमारी संताने कॉकरोच कैसे हो गई। मानवता का विकास होता है कॉकरोच जिस अर्थ में कहा गया उसे आशय यह निकलता था कि ये समाज के लिए जरूरी नहीं है और इन्हें खत्म किया जा सकता है। 
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के द्वारा किए गए दमन की खूब चर्चा होती है उन्होंने जब चुनाव घोषित किया तो उन्हें गालियां भी खूब पड़ी। पर उन्हें जो गालियां मिलती थी वैसी गलियां नहीं थी जो पिछले हफ्ते जंतर मंतर से प्रधान सेवक को मिली। 11-12 में मनमोहन सिंह के खिलाफ नौजवानों ने खूब नारे लगाए पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को झूठा, दलाल, भगोड़ा, रंडवा नहीं कहा गया पर इस बार ये सब अपशब्द नहीं और भी बहुत कुछ कहा गया जिसे यहां पर नहीं लिखा जा सकता। इस बार गाली देने वाले में से बहुत से युवा वे ही थे जिन्होंने 2014 में मोदी को वोट दिया था। 19 में भी दिया होगा बहुत से युवाओं ने उस अपील पर उन्हें वोट दिया था। जिन्होंने सेवा की शहादत पर वोट मांगा था। आखिर उन्हें हिसाब तो लगाना था जब उन्होंने हिसाब लगाया तो बदले में गालियां ही दी। 
भारतीय जनता पार्टी का शिक्षा क्षेत्र कटुता से भरा पड़ा है जब सरकार बनी थी पहला मुद्दा हैदराबाद यूनिवर्सिटी का रोहित वेमूला कांड था। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रदर्शनों से पूरा देश वाकिफ है प्रदर्शन के दौरान उन्हें टुकड़ा टुकड़ा गैंग का जुमला चलाया गया यही हाल जामिया यूनिवर्सिटी में किया गया। जेएनयू के छात्रों को वैश्या तक कहा गया। उन सब शिक्षा मंत्रियों का नाम याद कर लें स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल निशंक, धर्मेंद्र प्रधान और अब पहलाद जोशी इनका एजेंडा एक ही है और वह एजेंडा मूल रूप से इन्हें आरएसएस ने देकर रखा है। मामला सिर्फ नीट यूजी के पेपर लीक का नहीं है। बोर्ड परीक्षा की कॉपी कंप्यूटर बेस्ड जांचने का भी है। ऑन स्क्रीन मार्किंग से लाखों युवा परेशान हुए जिसका जवाब सरकार के पास नहीं था। सरकार व्यापक सुधार की जगह छोटा-मोटा उपाय दिखती है। कहते हैं हर हफ्ता एक मेडिकल कॉलेज खुलता है पर भारत की एक भी यूनिवर्सिटी विश्व के विश्वविद्यालय की दौड़ में स्थान नहीं पाती। यह कौन सा शिक्षा क्षेत्र है जहां सिर्फ पैसे की भूख है। सरकारी स्कूल बंद होते जा रहे हैं और पूंजी पतियों द्वारा प्रायोजित स्कूल बढ़ रहे हैं आखिर हम लोकतांत्रिक समाजवादी देश के स्थान पर शिक्षा और स्वास्थ्य का निजीकरण करके किस तरह के तंत्र को बना रहे हैं।