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आपत्ति के बावजूद ट्रक की सुपुर्दगी में धालमेल
- By 24hnbc --
- Tuesday, 12 Oct, 2021
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। बिलासपुर आरटीओ में दोपहिया वाहनों में नाम तबादला का फर्जी वाडा कई बार पता चलता है इसे लुटिया चोर की श्रेणी में माना जाता है। किंतु इस बार आरटीओ के कर्मचारियों ने सीधे-सीधे डकैती ही डाल दी फाइनेंस कंपनी के कथित सीजर के साथ गिरोह बंदी करते हुए चोरी का ट्रक बेचने में खुली भूमिका निभाई एक तो बढ़ते डीजल के दामों ने ट्रांसपोर्ट व्यवसाय का कबाड़ा कर रखा है और कोरोना के बाद वैसे भी बैंकिंग सेक्टर में जो छूट दी थी वह छुट भी मिलीभगत से वास्तविक उपभोक्ता तक नहीं पहुंची । यह मामला अशोक लीलैंड ट्रक नंबर सी जी -10,ए टी - 6144, वाहन मालिक अश्वनी सोनवानी का है वह अपने वाहन की किस्त समय पर पटा रहे थे लोन कंपनी के रिकवरी एजेंट ने कोरोना मोनेटाइजेशन का लालच देकर किस्त में जानबूझ अनियमितता कराई यह कह के की सीजिंग नहीं होगी और बिहार के मुजफ्फरपुर में सीजिंग करा दी पहले गाड़ी मालिक ने बिलासपुर जिला पुलिस के पास आवेदन लगाया पुलिस ने हस्तक्षेप अयोग्य मामला कहकर 155 काट दिया इसी बीच यार्ड में गाड़ी अन्य व्यक्ति को बेच दी गई वाहन मालिक के नाम परिवर्तन पर बिलासपुर आरटीओ ने आपत्ति दर्ज कराई और आरटीओ ने वाहन को ब्लैक लिस्टेड किया 30 सितंबर को कोनी थाना क्षेत्र से आरटीओ का एक कर्मचारी वाहन को ले जाते हुए दिखाई देता है वाहन मालिक ने जब्ती पर्ची प्राप्त करने के लिए आरटीओ में आवेदन किया था किंतु आरटीओ ने वाहन उसे ही वापस कर दिया जिसे जप्त किया गया था। पूरे मामले में ऐसा लगता है कि फाइनेंस कंपनी हिंदुजा और बिलासपुर परिवहन कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत है और खामियाजा अश्वनी को भुगतना पड़ रहा है एक तरफ उसने किस्त पटाई छल पूर्वक वाहन उसी का जप हुआ और उसे वापस भी नहीं किया गया और अब जब वाहन मालिक कोई भी पत्र लेकर आरटीओ बिलासपुर जाता है तो उसे आवक जावक से पार्टी भी नहीं दी जाती जिसके पीछे आरटीओ की नियत यह है कि आवेदक न्याय के लिए कोर्ट न जा सके इसे सीधे शब्दों में आरटीओ की डकैती ही कहा जा सकता है।


