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भारतीय किसान जाए भाड़ में, मुर्गी पालक चाहते हैं कि सोयाबीन आए अमेरिका से
- By 24hnbc --
- Monday, 01 Jun, 2026
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बिलासपुर, 2 जून 2026।
सस्ता प्रोटीन अंडा और चिकन अब महंगा होने जा रहा है। इससे जुड़े संगठन ने हाल ही में तय किया है कि चिकन का उत्पादन 25 प्रतिशत घटा दिया जाए... राजनांदगांव में इस उद्योग से जुड़े संगठनों की एक बैठक हुई जिसमें कहा गया कि सोयाबीन मिल की कीमतों में 1 महीने में 40% की वृद्धि हुई है और लागत बढ़ गई। सरकार से उम्मीद जताई है कि जीएम सोयाबीन मिल के आयात की अनुमति दी जाए। उद्योग को अपने राजनीतिक आकाओं पर भरोसा है। सरकार जीएम सोयाबीन मिल के आयात की अनुमति देकर उद्योग को राहत देगी। यह पूरा टिक्रम जाता रहा है कि अब उद्योगपति कैसे भारतीय किसानों की बर्बादी की दास्तान लिखने को उतारू है। बहुत साल तक भारतीय किसानों ने बीटी बैगन, बीटी कपास और जीएम उत्पादन को भारत में घुसने नहीं दिया पर अब जब से अमेरिका ने भारत के साथ समझौता साइन किया है इस बात पर कोई शक नहीं कि अमेरिका के उत्पादन भारत में घुस पड़ेंगे और भारतीय किसान की दुर्दशा निश्चित है। सोयाबीन का मुख्य उपयोग खाद्य तेल में है। तेल के दाम लगातार बढ़ते चले गए और तेल के धंधे पर केवल दो कंपनियों की मोनोपोली है।
अब दूसरा धंधा सस्ता प्रोटीन अर्थात अंडा और चिकन यहां भी मिल तैयार करने में सोयाबीन की मुख्य भूमिका है। आंकड़े बताते हैं कि भारत अंडा उत्पादन में चीन के बाद दूसरे नंबर पर है 2024 - 25 में देश में कुल 149.11 अरब अंडा पैदा हुआ। यह पोल्ट्री की शानदार प्रदर्शन को प्रगति को बताता है। अंडा उत्पादन का 65% हिस्सा दक्षिणी और पूर्वी राज्यों से आता है। नंबर एक पर आंध्र प्रदेश कुल अंडा उत्पादन का 19%, उसके बाद क्रमशः तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक है। भारतीय खाद्य सर्वेक्षण के अनुसार प्रति व्यक्ति अंडे की उपलब्धता 106 अंडा प्रतिवर्ष हो गई है।
निर्यात की स्थिति भी बहुत बढ़िया थी पर कड़ी में लगी आग ने अंडे के निर्यात को 20% का झटका दिया। ओमान को जाने वाले अंडे के निर्यात में 90% की गिरावट दर्ज हुई। इस स्थिति से लगता था कि अंडे के दामों में भारी गिरावट होगी। पर भीषण गर्मी में भी अंडे के रेट नहीं टूटे और अब अंडा उत्पादकों ने एक तरफ 25% उत्पादन घटने का निर्णय ले लिया और साथ ही सरकार पर विदेशी सोयाबीन जीएम उत्पादन और आयात के लिए दबाव बना दिया कुल मिलाकर आम भारतीय उपभोक्ता की जेबों से तेल और दाल ने अतिरिक्त रकम खींची है और अब अंडा भी जो कभी सस्ते प्रोटीन का मुख्य स्रोत था पर भी जमा करो की नजर है।


