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अनिल अंबानी कोबरा पोस्ट के लपेटे में आए, 28874 रुपए करोड़ घोटाले का लगा आरोप
- By 24hnbc --
- Thursday, 30 Oct, 2025
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नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2025।
खोजी पोर्टल कोबरा पोस्ट (Cobrapost) ने अपनी ताज़ा कवर स्टोरी “LOOTWALLAHS: HOW INDIAN BUSINESS IS ROBBING INDIANS (Part-I)” में खुलासा किया है कि अनिल अंबानी के स्वामित्व वाले रिलायंस एडीए ग्रुप (Reliance ADA Group) की कंपनियों ने लगभग ₹28,874 करोड़ के कथित वित्तीय घोटाले को अंजाम दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, समूह ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और निवेशकों से लिए गए धन को ग़लत तरीके से अपनी प्रमोटर-ग्रुप कंपनियों में स्थानांतरित किया, जिससे यह भारी-भरकम रकम निजी लाभ के लिए उपयोग में लाई गई। इतना ही नहीं, जांच में यह भी पाया गया कि करीब 1.53 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹12,000 करोड़) की राशि विदेश से संदिग्ध रूप से इन कंपनियों में पहुंची।
कोबरा पोस्ट के मुताबिक, यह वित्तीय जालसाज़ी कई स्तरों पर रची गई थी — जिसमें शेल कंपनियों का नेटवर्क, डमी ट्रांजैक्शन और फर्जी विदेशी निवेश शामिल हैं। रिपोर्ट ने इसे “इंडियन बिज़नेस द्वारा भारतीयों को लूटने का संगठित मॉडल” बताया है।
इस पूरी जांच से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट और दस्तावेज़ Cobrapost की वेबसाइट पर प्रकाशित किए गए हैं:
https://www.cobrapost.com/blog/cobrapost-investigation-lootwallahs-how-indian-business-is-robbing-indians-part-i/13871
https://cobrapost.com/blog/press-release-the-lootwallahs-how-indian-business-is-robbing-indians-part-1/13870
कोबरा पोस्ट ने अपनी वीडियो सीरीज़ के माध्यम से इस कथित वित्तीय साम्राज्य की परतें भी खोली हैं
कोबरा पोस्ट की यह जांच देश के कॉरपोरेट जगत में पारदर्शिता, बैंकिंग नियमन और विदेशी निवेश की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
कोबरा पोस्ट की पड़ताल: ‘झूठ का बहीखाता’ में क्या है?
खोजी वेबसाइट कोबरा पोस्ट (Cobrapost) ने अपनी विस्तृत जांच “The Ledger of Lies” में दावा किया है कि अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (Reliance ADA Group) ने 2006 से अब तक ₹28,874 करोड़ से अधिक का बैंकिंग घोटाला किया। यह धनराशि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, आईपीओ निवेशकों और बॉन्ड जारी करके जुटाई गई रकम से आई थी, जिसे समूह की सूचीबद्ध कंपनियों से निकालकर प्रमोटर-ग्रुप की कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया।
जांच के अनुसार, लगभग 1.535 अरब अमेरिकी डॉलर (₹13,047.50 करोड़) की राशि विदेश से भी संदिग्ध तरीके से भारत लाई गई। इसमें से 750 मिलियन डॉलर सिंगापुर स्थित Emerging Market Investments & Trading Pte (EMITS) को दिए गए, जो अस्थायी रूप से Reliance Innoventures (ADA Group की होल्डिंग कंपनी) की कस्टडी में था। यह पूरी राशि भारत में लाई गई और बाद में विभिन्न सहायक कंपनियों के माध्यम से गायब कर दी गई, जो मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आ सकता है। इसी प्रकार, 785 मिलियन डॉलर की विदेशी वाणिज्यिक उधारी (External Commercial Borrowings) भी विभिन्न एडीए समूह कंपनियों में स्थानांतरित की गई।
इस प्रकार, कुल घोटाले की राशि ₹41,921.57 करोड़ से अधिक बताई गई है।
कोबरा पोस्ट का कहना है कि यह पूरा वित्तीय जाल कंपनी अधिनियम 2013, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), सेबी अधिनियम और आयकर अधिनियम सहित कई कानूनों का उल्लंघन करता है।
जांच में मिले दस्तावेज़ कंपनी मामलों के मंत्रालय (MCA), सेबी (SEBI), एनसीएलटी (NCLT), भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और विदेशी न्यायिक अभिलेखों से लिए गए हैं। कोबरा पोस्ट ने इन स्रोतों का गहन विश्लेषण कर सभी आंकड़ों की सत्यापन और मिलान प्रक्रिया की है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 2008 में अनिल अंबानी ने 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लग्ज़री यॉट खरीदी थी, जिसे उन्होंने अपनी पत्नी टीना अंबानी को उपहार में दिया। यह यॉट कथित तौर पर रिलायंस कम्युनिकेशन, जो एक सूचीबद्ध कंपनी है, के धन से खरीदी गई थी।
कोबरा पोस्ट के मुताबिक, रिलायंस कम्युनिकेशन, रिलायंस कैपिटल, रिलायंस होम फाइनेंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस कॉर्पोरेट एडवाइजरी सर्विसेज जैसी कंपनियों में धन के विचलन के कई मामले दर्ज हैं।
इन कंपनियों ने दर्जनों शेल कंपनियों और ऑफशोर इकाइयों (BVI, साइप्रस, मॉरिशस, अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर) के माध्यम से धन को इधर-उधर घुमाया, ऋण के रूप में दिया, डिबेंचर या प्रेफरेंस शेयर जारी किए और बाद में उन ऋणों को लिखकर समाप्त (write-off) कर दिया।
कोबरा पोस्ट का निष्कर्ष है कि एडीए समूह की इन कंपनियों ने कॉरपोरेट गवर्नेंस और वित्तीय अनुशासन को ताक पर रखकर सुनियोजित तरीके से जनता, बैंकों और निवेशकों को ठगा। परिणामस्वरूप, जांच में शामिल सभी छह प्रमुख एडीए समूह कंपनियाँ भारी घाटे में चली गईं, जबकि देशभर के लाखों निवेशकों को नुकसान हुआ।
यॉट खरीद से शुरू हुई फर्जीवाड़े की कहानी
2008 में अनिल अंबानी ने अपनी पत्नी टीना अंबानी के लिए लगभग 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लग्ज़री यॉट खरीदी। यह यॉट रिलायंस ट्रांसपोर्ट एंड ट्रैवल्स प्रा. लि., जो एडीए समूह की एक सहायक कंपनी है, के माध्यम से खरीदी गई।
कोबरा पोस्ट के मुताबिक, यॉट की खरीद के लिए धन रिलायंस कम्युनिकेशन (RCOM) से एक जटिल प्रक्रिया के तहत ट्रांसफर किया गया — पहले जर्सी स्थित Ammolite Holdings Limited को 4 लाख डॉलर में चार्टर के रूप में भुगतान दिखाया गया, फिर उसी धन को “हैंडसेट खरीद” के नाम पर Gateway Net Trading के ज़रिए Reliance Transport & Travels में भेजा गया, और अंततः यॉट के भुगतान के रूप में Ferretti SPA (इटली) को भेज दिया गया।
₹14,529 करोड़ का बड़ा डायवर्जन
रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस कैपिटल, रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस ने मिलकर ₹14,529.18 करोड़ की राशि ऑफशोर और घरेलू इकाइयों में ट्रांसफर की।
इसके लिए CLE Pvt. Ltd. नामक एक स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) का इस्तेमाल हुआ, जिसका नाम कई बार बदला गया ताकि असली लाभार्थियों की पहचान छिपाई जा सके।
इन कंपनियों से धन Edico Ventures नामक प्रमोटर-ग्रुप कंपनी के माध्यम से वापस समूह में पहुंचाया गया।
इस पूरी प्रक्रिया में ₹10,049 करोड़ रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, ₹3,270 करोड़ रिलायंस कैपिटल, ₹286 करोड़ रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस, और ₹800 करोड़ यस बैंक से लिए गए।
26 ऑफशोर शेल कंपनियाँ
कोबरा पोस्ट ने 26 विदेशी शेल कंपनियों की पहचान की है जिनमें से 14 के ठिकाने पता चले हैं। इनमें जर्सी, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स और साइप्रस में स्थित कंपनियाँ शामिल हैं, जैसे
Tanzanite Holdings, Radium Unlimited, Reindeer Holdings, AAA Enterprises, Ikosel Investments, और Karhula Enterprises।
इन सभी को Reliance Innoventures, Edico Ventures, और Reliance Inceptum जैसी समूह कंपनियों से पैसा मिला।
फाइनेंस कंपनियों में भारी गड़बड़ी
Reliance Home Finance Ltd. ने 49 कंपनियों को कर्ज के रूप में ₹7,965 करोड़ दिए, जो बाद में 14 एडीए समूह कंपनियों के पास लौट आए। Reliance Commercial Finance Ltd. ने 27 कंपनियों के ज़रिए ₹4,979.89 करोड़ का डायवर्जन किया। Reliance Corporate Advisory Services ने बिना ब्याज वाले इंटर-कॉरपोरेट लोन के माध्यम से ₹1,400 करोड़ की हेराफेरी की।
इन कंपनियों के ऋण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से लिए गए थे, जो बाद में एनपीए बन गए। बाद में इन्हें Authum Investment & Infrastructure Ltd. ने CIRP प्रक्रिया के तहत अधिग्रहित किया।
मनी लॉन्ड्रिंग का जाल और विदेशी फंडिंग
कोबरा पोस्ट की जांच में सामने आया कि एडीए समूह ने विदेश से 1.535 अरब अमेरिकी डॉलर (₹13,047.50 करोड़) भारत में संदिग्ध रूप से लाए।
इसमें से 750 मिलियन डॉलर NexGen Capital से सिंगापुर की कंपनी EMITS (Emerging Market Investments & Trading Pte) को दिए गए, जिसने यह राशि Reliance Innoventures की सहायक कंपनियों में स्थानांतरित कर दी। बाद में EMITS और उससे जुड़ी सभी कंपनियाँ विलय (merger) या विघटन (dissolution) के ज़रिए समाप्त कर दी गईं ताकि ट्रांज़ैक्शन का रिकॉर्ड मिटाया जा सके।
₹3.38 लाख करोड़ की चौंकाने वाली तस्वीर
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के अनुसार, एडीए समूह की नौ कंपनियों पर ₹1,78,491 करोड़ के बकाया ऋण हैं।
साथ ही, 2008 से अब तक इन कंपनियों के निवेशकों को ₹1,59,721 करोड़ का नुकसान हुआ।
इस तरह कुल मिलाकर ₹3,38,212 करोड़ की सार्वजनिक धनराशि गायब हो गई।
चार सार्वजनिक बैंकों — बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया — ने एडीए समूह की कई कंपनियों को “फ्रॉड अकाउंट” घोषित किया है।
कोबरा पोस्ट ने इस पूरे घोटाले को “एक जटिल, सुनियोजित और साहसी वित्तीय अपराध” बताया है, जो भारतीय बैंकिंग और नियामक प्रणाली की भारी विफलता को उजागर करता है।


