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बाजारवाद की लहर पर सवार दिवाली, बूम नहीं फूस होने वाली है

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बिलासपुर, 13 अक्टूबर 2025। 
जीएसटी 2.0 की घोषणा हुई काफी वक्त बीत गया जिस दिवाली को देखकर यह घोषणा की गई थी उस इम्तिहान का वक्त भी आ गया है। इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिकल, ऑटोमोबाइल सब खूब विज्ञापन डालें ऑटोमोबाइल ने नवरात्रि के समय बिकने वाले वाहन का डाटा भी प्रायोजित किया। पर सब का लाभ वैसा नहीं था जैसा अपेक्षा हुई थी। छोटे व्यापारी से लेकर बड़े व्यापारी तक ने बातचीत में यह माना कि कोविड पूर्व की दिवाली के आंकड़े को हम छू भी नहीं पाते। छोटे कपड़ा व्यापारी ने तो स्पष्ट कहा अब हम त्यौहार को ध्यान में रखकर माल नहीं भरते। ग्राहक अपनी जरूरत के मुताबिक कपड़े खरीदता है। त्योहार चाहे दिवाली हो या राखी अब वह मायने नहीं रखता जो पूर्व में था। क्या इसके लिए ऑनलाइन मार्केटिंग ऐप भी जिम्मेदार है। तो उन्होंने अपनी गर्दन हां में हिलाई। कहा वह दिन दूर नहीं जब कार भी शोरूम से नहीं ऐप से बिक जाएगी। 
बिलासपुर में इन दोनों सराफा बाजार के परंपरागत व्यवसाय ब्रांड नेम के सामने कसमसाते दिखाई दे रहे हैं। यहां तक की संघ का पदाधिकारी भी जागरूकता के प्रायोजित समाचार लगवाने में परहेज नहीं करता। सराफा बाजार में धांधली पर धनतेरस के पूर्व अलग से रिपोर्ट लिखेंगे। 
पूरे शहर में जीएसटी चोरी शबाब पर है लगता है व्यापारी बगैर बिल, बगैर जीएसटी पेड माल ही बेचना चाहता है। एक हाल के अंदर तीन-तीन चार-चार दुकानें संचालित है अर्थात एक ही पते पर चार बिलिंग होती है। बाजार में त्यौहार के बावजूद सन्नाटा क्यों है क्या उपभोक्ता फर्जी त्यौहार वाद बाजार वाद के दबाव को समझ चुका है और जान गया है कि क्षणिक उत्तेजना भावना उसके अगले दो महीने बर्बाद कर देती है।
 
 
 
 
 
 
(समाचार संकलन डाॅली पटेल)