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छत्तीसगढ़ के 3 बड़े मिशन अस्पतालों पर ओडिशा के फरार बिशप का कंट्रोल? कलेक्टर से लेकर अमेरिकी एजेंसी तक शिकायत

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मुंगेली, 15 अक्टूबर 2026 
 छत्तीसगढ़ के मिशन अस्पताल मुंगेली, बैतलपुर और तिल्दा को चलाने वाला हेल्थ बोर्ड उड़ीसा से संचालित हो रहा है। इस बोर्ड के पीछे उड़ीसा के बिशप एस.के. नंदा हैं, जिनके खिलाफ रायपुर थाने में गैर-जमानती धाराएं दर्ज हैं और जो फरार बताए जा रहे हैं। उन्होंने निवेदिता नाम की एक बेरोजगार डॉक्टर के साथ मिलकर यह हेल्थ बोर्ड बनाया, जिसमें छत्तीसगढ़ डायोसीज के हिस्ट्रीशीटर बताए जा रहे बिशप सुषमा सिंह, नितिन लॉरेंस और जयदीप रॉबिंसन को जगह दी गई।
मुंगेली, बैतलपुर और तिल्दा अस्पताल FCRA फंडिंग से चलते हैं। इन अस्पतालों की हर ईंट से लेकर मेडिकल उपकरण तक विदेशी सहायता से खरीदे गए हैं। गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए दिए गए दान को अब कमाई का जरिया बना दिया गया है। बिशप नंदा और छत्तीसगढ़ डायोसीज के उनके सहयोगियों ने बेरोजगार डॉक्टर निवेदिता को बोर्ड का सचिव बना दिया और खुद अध्यक्ष बन बैठे।
शासन और दिल्ली के सिनॉड को जानकारी दिए बिना वही हरकत शुरू कर दी गई, जिसके कारण पहले मिशन अस्पताल बिलासपुर और गॉस मेमोरियल ग्राउंड रायपुर का सरकारीकरण हुआ था। अब मामला और गंभीर है क्योंकि FCRA के तहत आए डॉलर का दुरुपयोग होने का आरोप है। पिछले पांच सालों में मुंगेली अस्पताल का करोड़ों का सामान कबाड़ी रेट में बेचा गया, बैतलपुर अस्पताल किराए पर दे दिया गया और तिल्दा में भी ऐसा ही खेल चल रहा है। FCRA फंड के इस तरह के दुरुपयोग का यह देश में पहला मामला हो सकता है। इसकी जिम्मेदारी इन हिस्ट्रीशीटर सदस्यों की कमेटी पर मानी जा रही है।
मुंगेली और रायपुर जिले के जिलाधीश के साथ इसकी रिपोर्ट अमेरिका की एजेंसी को भी दी गई है, जो शीघ्र अपनी रिपोर्ट भारत सरकार को सौंपेगी।