
बिलासपुर 24 hnbc.
सोमावार को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए या नहीं यह मामला अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से चर्चित रहा है। इस संदर्भ में एक से अधिक शिकायतें होते रहे और विशेषकर बिलासपुर जिले में और मध्यप्रदेश के बालाघाट में सोमावार सरनेम को उपयोग करने वाले लोगों के विरुद्ध कई शिकायतें हुई हालांकि इस संदर्भ में एक बार अविभाजित मध्यप्रदेश के समय में और दूसरी बात 2014 में छत्तीसगढ़ राज्य में बने आयोग की ओर से इस प्रकरण में अंतिम निर्णय दिए गए और निर्णयों में यह माना गया कि बालाघाट तहसीलदार द्वारा जारी 1992 का जाति प्रमाण पत्र और बिलासपुर तहसीलदार द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र वैध है । और जाति छत्री सरनेम सोमावार आरक्षण का लाभ ले सकते हैं । इन दिनों जल संसाधन विभाग के सीई सोमावार कि जाति का प्रकरण दोबारा चर्चा में है आयोग से प्राप्त जानकारी के आधार पर कहा जा सकता है कि वर्ष 2014 में दुग्गल सहित चार अन्य लोगों ने एक आदेश पारित किया जिसमें यह जाति प्रकरण का निराकरण हो चुका है। इसी संदर्भ में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के सिंगल बेंच और डबल बेंच के भी आदेश स्पष्ट हैं इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी पर अंतिम निर्णय आ चुका है साथ ही एक बार मध्य प्रदेश सरकार भी सुप्रीम कोर्ट में प्रकरण चुकी है और जाति प्रकरण सोमावार के पक्ष में गया है ऐसा लगता है कि व्यवस्था बदलने के बाद जल संसाधन विभाग में पदोन्नति का फिर से हल्ला है और यही वह कारण है कि सोमावार के जाति प्रकरण को फिर से हवा दी जा रही है।