
बिलासपुर 24 hnbc.
एक समय था जब रतनपुर क्षेत्र में सुबह से लेकर शाम तक पक्षियों की कलरव हर मौसम में सुनाई देती थी जहां का नजारा खूबसूरत था। पहाड़ और पेड़, तालाब का पानी मिलकर मौसम को पूरे साल खुशनुमा बना कर रखते थे किंतु अब ऐसा नहीं है नेशनल हाईवे 130 जिसके निर्माण के समय रतनपुर की पहाड़ियों के 50% हिस्से को समतल कर दिया गया उस कारण जो धूल का अंबार लगा हुआ है पहाड़ को तोड़ने के लिए असम के बाद जो डायनामाइट विस्फोट किया गया और आजू बाजू से पानी के गायब होने के चलते अब रतनपुर क्षेत्र में पक्षियों की संख्या आधे से कम हो गई है पहाड़ का पहले वस्त्र उतारा गया अर्थात उसको वृक्ष विहीन किया गया और बाद में पहाड़ को ही हटा दिया गया । और इस पूरे कृत्य में लगभग 120 परिवार पहाड़ से हटा दिए गए किंतु इस संबंध में कभी कोई आंकड़ा एकत्र नहीं किया गया कि पहाड़ हटाने से कितने पक्षी विस्थापित हो गए एक आदर्श आबोहवा जब समाप्त हो गई तो हजारों की संख्या में पक्षियों ने यह क्षेत्र ही छोड़ दिया एक तरफ बिलासपुर के कुछ तालाब है से हैं जहां पर रितु बदलने के साथ प्रवासी पक्षी आते हैं और रतनपुर का तालाबों से भरपूर यह क्षेत्र अब ऐसा है कि यहां स्थानीय पक्षियों ने ही मुंह मोड़ लिया है किंतु यह नागरिक सभ्यता है जब इसे अपने नागरिकों के ही विस्थापन की चिंता नहीं तो ऐसे में पक्षियों के पुनर्वास और विस्थापन पर कुछ कहना भैंस के सामने बीन बजाने के समान है गौरतलब है कि नेशनल हाईवे 130 अदानी ग्रुप का प्रोजेक्ट है और इसे इस क्षेत्र में राधेश्याम अग्रवाल नाम का एक ठेकेदार पूरा कर रहा है।