
बिलासपुर 24 hnbc.
बिलासपुर। 2002 मैं उस समय के महापौर बिलासपुर ने क्लीन सिटी ग्रीन सिटी का नारा दिया था। तब से आज तक शानदार 21 साल हो चुके हैं किंतु ना तो शहर ग्रीन हुआ ना क्लीन हुआ उल्टा बिलासपुर धूल भरा और उजाड़ होता जा रहा है आज नए मेयर को पद पर बैठे हुए 1 साल से अधिक समय हो चुका है किंतु नगर निगम में उपलब्धि के नाम पर कोई नई चीज नहीं है। हालत यह है कि स्मार्ट सिटी प्राधिकरण बस सेवा, अमृत मिशन, सीवरेज, ऑक्सीजन जोन जाने कितनी योजनाएं कराह कराह कर चल रही है। 2001 में छत्तीसगढ़ बनने के साथ शहर को जो महापौर मिला वह भाजपा कांग्रेस का संयुक्त था क्योंकि उसने चुनाव तो कांग्रेस के प्रत्याशी बैजनाथ चंद्राकर को मध्यप्रदेश के समय हराया और मेयर बना किंतु छत्तीसगढ़ बनने के बाद भाजपा का मेयर कांग्रेस में शामिल हो गया इस तरह वह मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ तथा भाजपा से कांग्रेस का मेयर था उनका नाम था उमाशंकर जायसवाल और वे काम के प्रति समर्पण की भावना के साथ तत्कालीन कलेक्टर के प्रभाव में यह दावा करते थे कि बिलासपुर ग्रीन सिटी क्लीन सिटी होगा। उस समय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री अजीत जोगी थे और काम की रफ्तार को देखकर लोगों को भरोसा भी होता था कि शहर बहुत जल्द क्लीन व ग्रीन होगा । कलेक्टर ऐसा कि पेड़ का एक पत्ता टूटने पर तोड़ने वाले को दफ्तर बुला लेता था शहर के नागरिक रात में अपने घरों में सोते थे और सुबह जब वह घूमने निकलते थे तब उन्हें एक नई सड़क की दर्शन होती थी किंतु देखते-देखते सरकार बदली निगम पर भाजपा का राज शुरू हो गया और लगातार 2019 तक चला अब राज्य में सत्ता परिवर्तन हो चुका है निगम में भी कांग्रेस का राज है निगम के पास बजट भी है इन सब के बावजूद क्लीन सिटी ग्रीन सिटी का सपना साकार नहीं होता दिखता लगता है कि निगम अमले के पास अब ऐसी ऊर्जा नहीं है।