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उद्योग की मनमानी नुकसान किसान का
Sunday, 07 Feb 2021 18:00 pm
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24HNBC जांजगीर-चांपा।। जिला प्रशासन की लापरवाही व निजी उद्योग संचालकों के मनमाने रवैये का खामियाजा क्षेत्र के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। यहां उद्योग संचालक निजी स्वार्थ के लिए किसानों को शासन द्वारा दी जा रही सिंचाई साधनों का ही अस्तित्व समाप्त करने में जुटे हैं। कन्हाईबंद में कोल साइडिंग के लिए क्षेत्र के किसानों के सिंचाई के लिए माइनर नहर को पाटकर साइडिंग का निर्माण करा दिया गया है। जिसके चलते माइनर का अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है। हालांकि किसानों ने इसकी शिकायत कलेक्टर से कर शीघ्र ही कार्रवाई की मांग की है, मगर प्रशासन भी इस संबंध में मौन है।प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को किसानों की हितैषी बताते हुए कर्ज में डूबे किसानों के लाखों रूपये ऋण मापᆬ किया, ताकि वे आर्थिक रूप से सुदृढ़ होकर कृषि कार्य कर सकें। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार करने व उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी योजना का शुभारंभ किया गया है। योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का मार्ग प्रशस्त होगा। योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए लगातार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा प्रशासन को दिशा निर्देश जारी कर स्वयं योजनाओं की मानिटरिंग कर रहे हैं, मगर दूसरी ओर जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी ही नियमों को ताक पर रखकर योजनाओं में रूकावट बन रहे हैं। यहां जिला प्रशासन के अधिकारियों की लापरवाही काखामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। उद्योग संचालकों द्वारा निजी स्वार्थ के लिए सिंचाई के साधनों का आस्तित्व ही समाप्त किया जा रहा है, बावजूद इसके प्रशासन द्वारा संबंधितों के खिलापᆬ कार्रवाई नहीं की जा रही है। क्षेत्र के किसान नहरों के माध्यम से अपने खेतों की सिंचाई करते थे, मगर क्षेत्र में लगातार बढ़ते औद्योगिकी करण व उद्योग संचालकों के मनमाने रवैये के चलते सिंचाई साधन भी सिमटने लगे है। जानकारी के अनुसार कई दशक पहले सिंचाई विभाग द्वारा कन्हाईबंद सहित अन्य क्षेत्र के किसानों के खेतों में सिंचाई सुविधा मुहैया कराने के लिए माइनर व माइक्रो मानइर का निर्माण कराया गया था, मगर क्षेत्र में लग रहे कोलवाशरी संचालक द्वारा साइडिंग निर्माण के दौरान यहां से होकर गुजरने वाली माइक्रो नहर को पाटकर साइडिंग का निर्माण कर दिया गया है। जिसके चलते किसानों को सिंचाई के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस नहर से लगभग 50 से 60 एकड़ जमीन में सिंचाई होती थी। प्रारंभ से ही लगातार किसानों द्वारा उक्त माइक्रो नहर के संबंध में जनप्रतिनिधियों से शिकायत कर सिंचाई साधन मुहैया कराए जाने की मांग की जा रही थी, मगर स्थिति जस की है। ऐसे में कन्हाईबंद के किसानों ने इसकी शिकायत कलेक्टर से कर शीघ्र ही कार्रवाई की मांग की। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया है कि गांव में दशक भर पूर्व कन्हाईबंद के भर्रीखार मेंकृषि कार्य के लिए शासकीय माइनर होकर गुजरी थी, मगर कोलवाशरी प्रबंधन द्वारा उक्त जमीन से होकर रेलवे साइडिंग बनाकर नहर को उसमे मिला लिया है। ऐसे में खरीपᆬ पᆬसल में सिंचाई नहीं हो पाती। वहीं पर्याप्त सिंचाई के साधन के अभाव में किसान रबी पᆬसल भी नहीं ले पा रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।