
24HNBC कोरबा। सार्वजनिक उपक्रम, बैंकों और बीमा कंपनियों को विभाजित करने के प्रस्ताव को भाजपा के समर्थित श्रमिक भारतीय मजदूर संघ (भामसं) ने विरोध शुरू कर दिया है। संघ का कहना है कि केंद्र को मजदूर व उद्योग में निर्णय लेना चाहिए, पर इन प्रस्तावों से विनिवेश व निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। निजी कारपोरेट सेक्टर सामने आएंगे, जो मजदूरों की छंटनी करेंगे। इस प्रस्तावों पर पुनर्विचार नहीं किया जाता है तो संघ भी विरोध का रास्ता अख्तियार कर आंदोलन करेगा।केंद्र सरकार का बजट प्रस्तुत होने के बाद समर्थित यूनियन भामसं ने नाराजगी जताना शुरू कर दिया है। संघ का कहना है कि एफडीआई के साथ आत्माननिर्भर भारत की अवधारणा को मिलाना व विनिवेश का रास्ता अख्तियार करना कर्मचारियों के अच्छा नही है। इसी तरह बीमा क्षेत्र में एफडीआई को बढ़ाकर 49 से 74 फीसदी करने के साथ बुनियादी ढांचा क्षेत्र में विदेशी निवेशों में छूट के लिए बीमा अधिनियम में संशोधन के सरकार के प्रस्तावों से विदेशी निर्भरता बढ़ेगी। संघ ने इस पर पुनर्विचार करने का प्रस्ताव रखा है। संघ के प्रदेश महामंत्री आरएस जायसवाल ने कहा कि केंद्र की नीतियों से निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। खास तौर पर सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंक व एक सामान्य बीमा कंपनी को विभाजित करने, विनिवेश के लिए नई कंपनियों को सूचीबद्ध करने से नुकसान होगा। संघ ने कहा कि श्रमिकों के लिए एक भी विशेष योजना नही की गई है। केंद्र की इस नीतियों को लेकर भारतीय मजदूर संघ ने विरोध करने नीति तैयार करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि आगामी 12 से 14 फरवरी तक चेन्नाई में होने वाली संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इनसभी मुद्दों पर मंथन किया जाएगा।