
बिलासपुर (24 एच एन बी सी) ।
जनसंपर्क के संभागीय कार्यालय मे कई माह से अपीलीय अधिकारी नहीं है ऐसा होने के कारण जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत प्रथम अपील प्रस्तुत नहीं की जा सकती, इस विभाग के मंत्री छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री हैं। ऐसे मे संभागीय दफ्तर खस्ताहाल रहे बड़ी बात है विभाग में पत्रकारों को अधिमान्यता देने संबंध मामलों में जमकर मनमर्जी होती है। मनमर्जी पर तथ्यात्मक जानकारी एकत्र करने के लिए आवेदक ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत यह आवेदन लगाया था कि अधिमान्यता प्राप्त करने के लिए पेश किए गए आवेदन पत्र साथ में संलग्न दस्तावेज की प्रमाणित प्रतिलिपि दी जाए किंतु आवेदक को जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई यह कहा गया कि यह मामला निजी श्रेणी में आता है अब इस निर्णय के विरुद्ध आवेदक को प्रथम अपील प्रस्तुत करनी है किंतु विभाग में संयुक्त संचालक का पद खाली पड़ा है ऐसे में प्रथम अपील बिलासपुर में प्रस्तुत नहीं हो सकते असल में अधिमान्यता के पीछे एक बड़ा घोटाला चल रहा है यहां माथा देखकर चंदन लगाया जाता है यहां मंदिर के बाहर नारियल बेचने वाले का अधिमान्यता हो जाता है किंतु सच में खबरों में काम करने वाले को समस्त कागज होने पर भी अधिमान्यता प्राप्त नहीं होती है । बंद पड़े अनियमित अखबार के संवाददाता को मुंगेली जिले से अधिमान्यता दी जाती है और वह पत्रकार बिलासपुर में पत्रकारों की एक संस्था का पदाधिकारी भी बन जाता है किंतु ऐसी वास्तविक बातें कागजों पर प्रमाणित ना हो जाए इसी कारण आवेदन पत्र और उसके साथ संलग्न दस्तावेज हो आरटीआई में नहीं देने के लिए कोशिश की जाती है कई लोगों का तो यहां तक दावा है कि गैर कानूनी गतिविधियों में संलग्न लोग भी आधिमान्यता प्राप्त करने के लिए आवेदन पत्र देते हैं और इनमें से कुछ पा भी जाते हैं यदि यह जानकारी सार्वजनिक हो जाएगी तो विभाग को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ेगा।इसलिए दस्तावेज सार्वजनिक ना करना ही उचित नजर आने लगता है।