
24HNBC जशपुरनगर। रेलविहिन जशपुर जिले में सड़क ही एकमात्र संपर्क का माध्यम है। लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ केन्द्र व राज्य सरकार की विभिन्ना योजनाओं के तहत निर्मित सड़कों की बदहाली की वजह से जिला विकास की दौड़ में लगातार पिछड़ता जा रहा है। भ्रष्टाचार और ठेकेदारों की मनमानी की वजह से करोड़ों रूपए खर्च के बावजूद जिलेवासी जर्जर सड़कों पर धूल और धक्के खाने पर विवश हो गए हैं। जिले में सड़कों की दुर्गति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राजधानी रायपुर तक सफर करने के लिए जनप्रतिनिधियों और आला प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आम लोगों को ओड़िशा और झारखंड की सड़कों का सहारा लेना पड़ता है। सबसे बुरी स्थितिपत्थलगांव से कुनकुरी के बीच चार साल से अधर में लटके हुए राष्ट्रीय राजमार्ग की है। तकरीबन 62 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण की जिम्मेदारी जीवीआर कंपनी को टेंडर प्रक्रिया के तहत दिया गया था। 272 करोड़ की लागत से बन रहे इस सड़क का निर्माण कार्य चार साल पूर्व तेजगति से शुरू हुआ था। जीवीआर कंपनी ने पत्थलगांव से लुड़ेग के बीच की सड़क को पूरी तरह से खोद कर नए सिरे से चौडीकरण और उन्नायन का काम शुरू किया था। लेकिन कुछ महिनों के बाद ही अचानक निर्माण कंपनी के वित्तिय संकट में फंस जाने की वजह से निर्माण कार्य अधर में लटक गया। कंपनी ने निर्माण कार्य जारी रखने में असमर्थतता जताते हुए,पूरी तरह से हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद दो अलग-अलग कंपनियों के माध्यम से इस अधूरे पड़े सड़क का निर्माण कार्य पूरा कराने का प्रयास किया गया। लेकिन नतीजा सिपुर रहा। इस बीच बुरी तरह से खुदे हुई यह सड़क जिले के आला जनप्रतिनिधियो व प्रशासनिक अफसरों के साथ आम लोगों के लिए एक बड़ी मुसीबत साबित हो रही है। पानी गिरते ही यह समूचा सड़क दलदल के दरिया में तब्दील हो जाता है। इस दौरान भारी वाहन तो दूर,दोपहिया वाहनों का इस सड़क से गुजरना मुश्किल हो जाता है। वहीं जिस तरपु की सड़कें खुदाई से बची हुई है,वो मेन्टेनेंस के अभाव में जर्जर होती जा रही है। कुल मिला कर कुनकुरी से पत्थलगांव के बीच 62 किलोमीटर का जशपुर,जिलेवासियों के लिए एक डरावना सपना बन कर रह गया हैं इससड़क को लेकर लंबे अर्से से विवाद और आक्रोश की स्थिति बनती रही है।