
बिलासपुर (24 एच एन बी सी) ।
एक तरफ नगर निगम अवैध प्लाटिंग पर एक्शन मोड पर दिख रही दूसरी ओर संविलियन ग्राम पंचायतो में बेजा निर्माण के निगम कि जमीन पर कब्ज़ा बदस्तूर जारी है कार्यवाही के बदले जमकर हो रही वसूली .
निगम विकास कार्य के लिए अपनी ही जमीन से बेजा कब्जा नही हटा पा रही फिर अवैध प्लाटिंग पर कार्यवाही से किसका होगा लाभ ..?
न्यायधानी में भाजपा शासन में जितना बड़ा विकास का दायरा बना था उसको देखने से लगता था मानो बिलासपुर एक छोटा क़स्बा है जहाँ किसी भी दिशा में 4 से 5 किमी कि दुरी तक ही विकास दिखता था और बिलासपुर शहर के पास उपलब्धि के नाम पर क्या रहा.जबकि एसईसीएल,एनटीपीसी,मेडिकल कालेज,उच्च न्यायालय,रेलवे जोन फिर क्यों विकास नही हुआ उस अनुपात में जिस अनुपात में रायपुर ने विकास किया.विकास के नाम पर .कई वर्षो से नगर निगम क्षेत्र को बढाने कि योजना पर सर्वे चल रहा था किन्तु निजी भलाई के चलते इस योजना में ताले डले हुए थे परन्तु जैसे ही यह ताला टूटा सभी दिशा से 12 किमी से ज्यादा दूर तक नगर निगम का कार्य क्षेत्र फ़ैल गया अब बिलासपुर नगर निगम के पास इतना बड़ा क्षेत्रफल है जहाँ निगम के हर विभाग को चौतरफा विकास पर ध्यान देना है और साथ ही तय करना है कि उनकी अपनी कार्य कि प्राथमिकता क्या होनी चाहिए..? लेकिन निगम अपनी ही संम्पत्ति कि सुरक्षा नही कर पा रही.निगम के पास बल कि कमी सुरु से रही है अब 70 वार्ड का बोझ कैसे उठाएगी इस पर विचार करना होगा शासन को .निगम जहाँ कुछ संविलियन हुए ग्राम पंचायतो में पहले से कुछ हिस्सों पर आवंटन प्राप्त कर अपना काम कर ही रहे थे जैसे मोपका में बहुत बड़ा हिस्सा निगम के पास था जिसमे निगम कांजी हॉउस का संचालन करते आ रही है और विभिन्न कार्य योजना प्रस्तावित है जिसमे सबसे बड़ी योजना सीवरेज प्लांट है जो कि इस क्षेत्र में स्थापित है वही दूसरी ओर घुरू गोकुल नगर जहाँ पहले से शहरी डेयरी संचालको केलिए डेयरी शेड का निर्माण किया गया जो कि हमेसा से विवादित रहा सुविधाओं का आभाव हमेसा से बना रहा जो आज तक दूर नही कि जा सकी.अभी कुछ महीनो से नगर निगम अवैध प्लाटिंग करने वालो पर सिकंजा कस रही है,बड़ी कार्यवाही होने कि बात कही जा रही है. जिन पंचायतो को निगम में सामिल किया गया है वही शासकीय जमीनों में धड़ल्ले से बेजा कब्जा के साथ बेजा निर्माण निरंतर जारी है और ऐसे ही मौको पर जोन कर्मी अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए है वसूली चरम पर है सफाई कर्मचारियो से लेकर कचरा गाडी चलाने वाले बेजा कब्जाधारियों और अधिकारियो के बिच बनते है सौदा का जरीया कुछ लोग कब्ज़ा कर घर बनाके कुछ दिन रहते है फिर कुछ महिना रहकर किसी और को बेच दे रहे है उन पर किस तरह कि कार्यवाही होगी और कब ?इतिहास गवाह है शनिचरी बाजार का बेजा कब्ज़ा 55 वर्ष से ज्यादा रहा जिसे अभी कुछ दिनों पूर्व हटाया गया.अवैध प्लाटिंग और कालोनाईजर पर सिकंजा कसा जाना चाहिए किन्तु जो सरेआम बेजा कब्जा कर रहे है पहले कार्यवाही उन पर होनी चाहिए नही तो भविष्य में विकास कार्य योजना के लिए जमीन नही मिलेगी