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24hnbc सेलर गौठान से निकली राजनीति की नई पौध, पूराने दावेदारों को किया दूर
Monday, 11 Jan 2021 18:00 pm
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बिलासपुर (24 एच एन बी सी) :-

           पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ग्राम सेलर में बड़ा कार्यक्रम हुआ । सेलर चूंकि बेलत रा विधानसभा क्षेत्र में आता है इसलिए मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कांग्रेस के तमाम दावेदार या यों कहें विधानसभा चुनाव के तमाम दावेदार तथा निपट जाने और निपटा देने वाले तमाम चेहरे दिखाई दिए । कई को अभी भी भरोसा है कि वे मुख्यमंत्री की परिक्रमा अभी से करेंगे तो 3 साल बाद उन्हें ही टिकट मिलेगी लेकिन चुनाव हार जाने व हरवा देने के बाद भी दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है एक खास बात और भी है कि कांग्रेस ने जीत सकने वाले दावेदार को टिकट नहीं दी जिससे लगातार बेल तरा से कांग्रेस पराजित होते आईं है । एक दावेदार सेलर के सरपंच धन्नजय सिंह “भोलू”भी है जो टिकट के काबिल भी है मगर कांग्रेस के नेताओ ने उनके नाम को गम्भीर और योग्य दावेदार के रूप में कभी भी पार्टी फोरम के समक्ष नहीं रखा ।

पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जहां सर्वाधिक 68 सीट हासिल कर भाजपा को करारी शिकस्त देते हुए सत्ता से बेदखल कर दिया वहीं बिलासपुर जिले से मस्तूरी और बेल तरा के साथ ही बिल्हा ने भाजपा की लाज रख ली जबकि बिलासपुर तखतपुर से भाजपा का वह तम्बू ही उखड़ गया जो 20 साल पहले भाजपा नेताओ ने गाड़ा था । बेल तरा से कांग्रेस की पराजय के बाद भी सेलर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में टिकट दावेदारों की भीड़ जमा हो गई थी मगर क्षेत्र से टिकिट की उम्मीद में पसीना बहाने वाले विनय शुक्ला को सेलर के कार्यक्रम में आमंत्रण ही नहीं दिया गया ।

बेलतरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट के लिए 20-22 दावेदारों की भीड़ में एक सशक्त युवा नया दावेदार धनंजय सिंह (भोलू) सरपंच ,सेलर भी सामने आ गया है ।

भोलू, आरक्षण पीड़ित होने के कारण सेलर में लगभग 15 वर्षों से उप सरपंच रहा, 2020 के पंचायत चुनाव में सेलर अनारक्षित होने के बाद पूरे बिल्हा जनपद में सर्वाधिक मतों से विजयी होकर सरपंच बना फिर सरपंच संघ का अध्यक्ष बन गया है।

विगत पाँच साल में बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी बहुल जंगल इलाक़ा में करोड़ों का निर्माण कार्य स्वीकृत करवाकर काम करने में भोलू लगातार सक्रिय रहा है, क्षेत्र में निर्माण कार्य करवाने के कारण बेरोजगार युवकों को रोज़गार देकर अपने साथ जोड़ने में वह काफ़ी सफल है रहा है ।सेलर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में धन्नजय सिंह काफी सक्रिय दिखे ।

2023 में कांग्रेस की टिकट मिलना तो बहुत कठिन है, लेकिन चुनाव के दौरान भोलू की भूमिका पर्याप्त प्रभावशाली हो सकती है, विशेषकर आदिवासी बहुल पंचायतों में ।

पुराने दावेदार और उनका निवास 

पुराने दावेदार- चंद्रप्रकाश बाजपेयी(बिलासपुर ), रमेश कौशिक(बिलासपुर ), भुनेश्वर यादव (बिलासपुर), राजेंद्र चावला(बिलासपुर)

उसके बाद – राजेंद्र साहू(सेंदरी),धनंजय सिंह(सेलर),अनिल राठौर(लिंगियाडीह)- बृजेशसाहू(बिलासपुर)

विनोद साहू(बिरकोना)वीरेंद्र साहू(रतनपुर)

त्रिलोक श्रीवास-स्मृति श्रीवास(कोनी)ज्वाला सूर्यवंशी(मंगला)झगरराम सूर्यवंशी(मटियारी)अनिल यादव(जलसो)

गीतांजली कौशिक(परसदा बिल्हा)सत्येंद्र कौशिक(बेलतरा)अरूण जायसवाल (बेलतरा), लक्ष्मी गहवई(बिलासपुर)

बसंत शर्मा(बिलासपुर)डॉ प्रदीप शुक्ला -संगीता शुक्ला(बिलासपुर )जयश्री शुक्ला (बिलासपुर)संध्या तिवारी(बिलासपुर), अंकित गौरहा(बिलासपुर),

विनय शुक्ला(भरारी)विजय केशरवानी (बिलासपुर) 

इसमें विनय शुक्ला ऐसा दावेदार है जिसने 2019 में सरपंच (भरारी) के पद पर रहते हुए कांग्रेस से बग़ावत कर अपनी पत्नी को नगर निगम बिलासपुर के वार्ड क्रमांक 63 से कांग्रेस उम्मीदवार के विरूद्ध पार्षद का चुनाव निर्दलीय लडवाया ।

पार्षद के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार विजयी रही ,विनय शुक्ला की पत्नी ज़मानत बचाने में भी असफल रही ।

2020 में पंचायत चुनाव के दौरान भरारी सरपंच पद आरक्षित हो जाने के कारण उप सरपंच बनने की रणनीति बनाकर भरारी पंचायत के सभी वार्ड में पंच के उम्मीदवार खडा करते हुए स्वयं विनय शुक्ला पंच के चुनावी मैदान में उतर गये लेकिन भरारी पंचायत के मतदाताओं ने विनय शुक्ला और उसके सारे उम्मीदवारों को सिरे से ख़ारिज करते हुए पंचायत की राजनीति से बाहर का रास्ता दिखा दिया ।विनय शुक्ला अब शहर की और बड़ी राजनीति करने में अपना ध्यान लगाया है उसे उम्मीद है उनके नेता उन्हे कही न कहीं तो एडजस्ट कर ही देंगे ।