
24hnbc पत्थलगांव -- शिक्षाकर्मी वर्ग 1 की नियुक्तियों में अनियमितता का मामला सामने आया है। कांग्रेस आईटी सेल के अध्यक्ष जितेन्द्र ठाकुर ने इसमें नियमों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से नियुक्तियां किए जाने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में भाजपा शासनकाल में हुई इन नियुक्तियों में जिला पंचायत कार्यालय में पदस्थ लिपिक की भूमिका को लेकर आराउल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में शिक्षाकर्मी वर्ग 1 की बड़े पैमाने पर नियुक्तियां हुईं हैं। इन नियुक्तियों को लेकर अब आरोप सामने आए हैं। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर कांग्रेस आईटी सेल के ब्लॉक अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ठाकुर ने जिला पंचायत में तत्समय पदस्थ कर्मचारियों पर मनमाने ढंग से नियुक्तियां करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि नियुक्तियों के लिए शासन द्वारा विज्ञापन जारी किया गया था। इस विज्ञापन में ही शासन द्वारा अभ्यर्थियों के चयन के नियम पूरी तरह सुनिश्चित कर दिए गए थे। परंतु नियुक्तियों में इन नियमों को ताक पर रख दिया गया। उन्होंने बताया कि नियुक्ति के समय चयन के लिए अभ्यर्थी के पास बीएड की डिग्री होने की आवश्यकता थी। परंतु कुछ अभ्यर्थियों को उनके पास बीएड की वैध डिग्री होने के बावजूद इस आधार पर नियुक्ति देने से इंकार कर दिया गया कि नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन के समय उनके पास बीएड की डिग्री नहीं थी वहीं कुछ की नियुक्ति को मार्गदर्शन प्राप्त करने के नाम पर रोक दिया गया। जबकि समान परिस्थिति होने के बावजूद कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी गई। और केवल बीएड ही नहीं अन्य वर्गों में भी अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। श्री ठाकुर ने बताया कि विज्ञापन की शर्तों के अनुसार अनुसूचित जनजाति वर्ग का अभ्यर्थी यदि व्यापम द्वारा जारी प्रावीण्य सूची में उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है तो उसकी नियुक्ति समान स्थान हासिल करने वाले सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी की भांति सामान्य वर्ग में की जानी चाहिए थी और उसके स्थान पर उसी जनजाति वर्ग के अन्य अभ्यर्थी को मौका दिया जाना था परंतु इसे दरकिनार कर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थी की नियुक्ति सामान्य वर्ग की बजाए उसी वर्ग में कर दी गई। उनका कहना है कि ऐसा कर अनुसूचित जनजाति वर्ग के सैकड़ों अभ्यर्थियों का अधिकार छीन लिया गया