
बिलासपुर (24 एच एन बी सी) :-
5 जनवरी को प्रदेश के मुख्यमंत्री जांजगीर में थे उनके साथ विधानसभा अध्यक्ष तथा प्रभारी मंत्री के साथ वरिष्ठ नेता भी जांजगीर के दौरे पर थे। दिन भर के व्यस्त कार्यक्रमों के बाद व्हीआईपी काफिला सर्किट हाउस पहुंचे । यहां पर सफल कार्यक्रम के लिए सब लोग एक दूसरे को बधाई दे रहे थे। किंतु इसी बीच पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह सर्किट हाउस पहुंचे और उन्होंने सीधे अपनी उपेक्षा की बात रखना शुरू की धीरे धीरे नेताओं के स्वर ऊंचे होने लगे राजा सुरेंद्र बहादुर का पारा इतना चढ़ा हुआ था कि वे अपनी उपेक्षा की कहानी सुनाने के लिए फर्श पर ही बैठ गए ।उन्होंने पहले तो राजनैतिक उपेक्षा का आरोप लगाया और सीधे-सीधे डॉक्टर महंत पर वंशवाद की राजनीति के आरोप भी ठोके उनका कहना था कि नगर पंचायत से लेकर ग्राम पंचायतों तक उनके और उनके आदमियों को हर जगह किनारे लगाया जा रहा है। और यह सब महंत जी के इशारे पर हो रहा है। उन्होंने खुल्लम-खुल्ला कहा कि पूरा जिला प्रशासन एक व्यक्ति के हाथों में केंद्रित है और जैसा स्पीकर हाउस से इशारा होता है वैसा काम होने लगता है उन्होंने कहा कि शक्ति नगर पंचायत में महिला अध्यक्ष है किंतु अध्यक्ष की जगह उनके पति का कारोबार चलता है। यह बात उचित नहीं कही जा सकती यही हाल जिला पंचायत की है असल में जिला जांजगीर में कांग्रेस के 3 फर हो गए है एक धड़ा महंत का कहलाता है। दूसरा मुख्यमंत्री का है और तीसरा संगठन का है ऐसे में 6 विधानसभा वाली जांजगीर में केवल 2 विधानसभा सीट कांग्रेस की है और इन 2 सीटों पर महंत जी की चलती है शेष 4 सीट में से दो बसपा और दो बीजेपी के पास है इस बार राज्य में कांग्रेस सरकार आने के बाद जिला जांजगीर में विकास कार्यकार्य की श्रृंखला गड़बड़ा गई है। और जनता को ऐसा लगता है की आम नागरिकों के काम अटक गए हैं। पिछले कुछ दिनों से प्रशासनिक हलकों में प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज के तरीकों को लेकर भी आलोचना मुखर हो रही है। पुराने कांग्रेसी नेता इन चीजों को लेकर व्यथित है किंतु उन्हें अपनी बात रखने के लिए उचित फोरम नहीं मिल रहा है फोरम ऐसा भी होना चाहिए जहां ना केवल बात सुनी जाए बल्कि कुछ रास्ता भी निकले हालाकी सर्किट हाउस में जो कुछ हुआ उसके होने से लोग इंकार कर रहे हैं। परंतु राजनैतिक हलकों में सर्किट हाउस की घटना का चर्चा खूब जोरो से रहा ।