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24hnbc खजाना खाली अत: अतिक्रमण हटाकर निगम कर रहा है, विकास के दावे
Sunday, 27 Dec 2020 00:00 am
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बिलासपुर  (24 एच एन बी सी) । नगर पालिक निगम बिलासपुर ने वर्ष 2020 में केवल अतिक्रमण हटाने का काम किए। और जिन क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाए गए उन क्षेत्रों में उन योजनाओं का कार्यवयन भी शुरू नहीं हो सका । जिनके लिए अतिक्रमण हटाए गए दो उदाहरण ही इस बात को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है। पहला अरपा नदी के किनारे हुई सड़क निर्माण के लिए हटाए गए अतिक्रमण और दूसरा मिट्टी तेल गली के आगे नेहरू नगर मुख्य मार्ग को जोड़ने वाली रोड पर से हटाए गए 43 मकान और 28 दुकानों का अतिक्रमण जिसमें दो धार्मिक स्थान और एक पंथ का प्रतीक चिन्ह शामिल है। 

पहली योजना में राज्य के पूर्व मुख्य सचिव की विशेष रूचि थी, इस कारण वित्त की भी कोई कमी नहीं थी। निगम ने ताबड़तोड़ तरीके से बरसों पुरानी बस्ती को हटाया यहां तक की निगम ने अपने स्कूल भवन को भी गिराया। टेंडर हुआ किंतु निविदा कर्ता ने बाद में हाथ पीछे खींच लिया। निगम के वरिष्ठ अधिकारी आज इस योजना पर बात करने से हिचकीचाते हैं। और यही कहते हैं कि रोड तो आज नहीं तो कल बन ही जाएगी। 

जनता यही पूछती है कि जब आज नहीं बननी थी तो आज हटाने की जल्दी क्यों थी । गौड़पारा के बाद नगर निगम को तालापारा क्षेत्र नजर आया सब जानते हैं, तालापारा क्षेत्र एक संप्रदाय विशेष का क्षेत्र है और कांग्रेस की तमाम राजनीतिक इच्छाशक्ति इस वोट बैंक के सामने सांस भरने लगती है हुआ भी यही 2 दिन कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों ने हिम्मत दिखाई हटाए जाने वाले झुग्गी झोपड़ियों में जनसभा की आम जनमत बनाने का दावा किया और बाद में पिटा समूह लेकर विकास भवन में बैठकर गणेश चौक के कब्जे हटाकर अपने मन की मुराद निकाली । यहां का कब्जा भी देख देख कर हटाया सड़क के दाई और अभय दान दिया और बाई ओर ऐसा व्यवहार किया जैसे दिशा मैदान के बाद सफाई की जा रही हो, संप्रदाय का प्रतीक चिन्ह , एक स्कूल और मेला स्थल तथा दो मंदिरों को हटाने पर तीखी आलोचना हुई है। ऐसा बताया जाता है कि विभाग की गोपनीय रिपोर्ट भी शासन के पक्ष में नहीं गई कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि विधानसभा सत्र में इस बात पर हंगामा भी हो सकता है वैसे निगम में जिन तीन परियोजनाओं का लोकार्पण मुख्यमंत्री से करवाने की सोच रखी है उस कार्यक्रम का बार-बार टल जाना भी अब राजनीतिक नजरियों से देखा जाने लगा है। नगर नियोजन विशेषज्ञों का ऐसा कहना है कि सीवरेज की असफलता पर से ध्यान हटाने का यह एक तरीका भी हो सकता है।