24hnbc मिशन का उखड़ने वाला है अब आखरी स्टंप
Monday, 12 Oct 2026 18:00 pm
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रायपुर/बिलासपुर, 14 अक्टूबर 2026।
छत्तीसगढ़ राज्य के भीतर मिशन अस्पताल के बचे हुए संस्थानों में आर्थिक गड़बड़ी की शिकायतें अब ऊपर तक जा रही है इसी संबंध में बैतालपुर के मिशन अस्पताल को लेकर जे रोबिन ने एक शिकायती ईमेल किया है इसे लेकर बड़ी चर्चा है। हम पत्र को जैसा था इस रूप में सीधा लग रहे हैं कहा जाता है कि यहां एफसीआरए फंड का बड़ा दुरुपयोग हो रहा है। एक और घटना एक दिन पहले मुंगेली के मिशन अस्पताल में हुई बताया जा रहा है कि मुंगेली के मिशन अस्पताल में पेड़ कटवाने के दौरान ड्राइवर को करंट लग गया और उसे मुंगेली के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वाहन चालक से जबरन पेड़ कटवाया जा रहा था और पेड़ से लगी हुई हाई टेंशन लाइन बंद भी नहीं कराई गई थी। अस्पताल में सालों से वेतन न मिलने की बात भी कहीं जा रही है। कहा जाता है कि कर्मचारियों का यहां खूब शोषण होता है। अब इसे तीन अस्पताल से जोड़कर देखें पहला 1 साल पहले बिलासपुर के मिशन अस्पताल के लीज रिन्यूअल का मामला छत्तीसगढ़ डायोसिस और cwbm के अधिकारी अलग-अलग कोर्ट में हारते चले गए और अस्पताल को नगर निगम ने बुलडोजर से तोड़ दिया। हालांकि अभी मामला सुप्रीम कोर्ट में है पर अस्पताल परिसर में नगर निगम का कब्जा है। मुंगेली के मिशन अस्पताल का प्रबंध भी बहुत ही लचर है और बैतालपुर अस्पताल के व्यवसाई करण को लेकर खबरें लग रही है कहा जाता है कि इस अस्पताल में बड़ी धनराशि एफसीआरए के रूप में आ रही थी जिसका लगातार दुरुपयोग किया गया। ऐसा लगता है कि ईसाई समाज के सेवा समर्पण का आखरी स्टंप भी अब उखड़ने वाला है।
विषय: इवेंजेलिकल मिशन अस्पताल, बैतालपुर के व्यवसायीकरण की स्वतंत्र जांच कराने के संबंध में
प्रेषक: जे. रॉबिन j.robin.bilaspur@gmail.com
प्रति: koshys@ucc.org
दिनांक: 7 जुलाई 2026, सुबह 10:15 बजे
आदरणीय श्री कोशी,
मैं यह पत्र इवेंजेलिकल मिशन अस्पताल (EMH), बैतालपुर की वर्तमान स्थिति को लेकर गहरी चिंता के साथ लिख रहा हूँ। यह एक ऐतिहासिक मसीही मिशन संस्थान है, जिसकी विरासत आज गंभीर खतरे में है।
इवेंजेलिकल मिशन अस्पताल की औपचारिक स्थापना 1948 में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और परिवार नियोजन परियोजना के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य मसीही सेवा भावना के साथ गरीबों और उपेक्षित लोगों को दयाभाव से स्वास्थ्य सेवाएं देना था। दशकों के दौरान, यह मध्य भारत के सबसे सम्मानित मिशन अस्पतालों में से एक बन गया।
वर्ष 1969 में, डॉक्टरों की कमी के चलते अस्पताल के बार-बार अस्थायी रूप से बंद होने के बाद, मिशनरी चिकित्सक डॉ. रूथ कैटन (Dr. Ruth Catton) को बैतालपुर भेजा गया। उनके नेतृत्व और समर्पण से अस्पताल पुनर्जीवित हुआ और समाज सेवा के अपने मूल उद्देश्य पर लौटा।
इसके बाद, डॉ. कुसुम मसीह और श्री एस. के. मसीह ने इस संस्थान को लगभग पचास वर्षों तक लगातार अपनी सेवाएं दीं। उनके असाधारण समर्पण की बदौलत अस्पताल अपने मूल उद्देश्य के प्रति समर्पित रहा और इसने हजारों मरीजों का भरोसा और सम्मान जीता। उनके सेवानिवृत्त होने और वेल्लोर चले जाने के बाद, ऐसा लगता है कि अस्पताल के स्वरूप और उद्देश्य में बुनियादी बदलाव आ गया है।
जानकारी मिली है कि वर्तमान हेल्थ गवर्निंग बोर्ड ने—अध्यक्ष बिशप नायक, सचिव डॉ. निवेदिता, और सदस्य श्री जयदीप रॉबिनसन व श्री नितिन लॉरेंस के नेतृत्व में—अस्पताल परिसर को व्यावसायिक (कमर्शियल) स्वास्थ्य गतिविधियों के लिए लीज (पट्टे) या सब-लीज पर दे दिया है।
साथ में लगा सार्वजनिक विज्ञापन यह दर्शाता है कि अस्पताल को अब एक व्यावसायिक अस्पताल के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना एक अच्छा कार्य है, लेकिन यह गंभीर चिंता का विषय है कि जो मिशन संस्थान केवल मसीही सेवा और भलाई के लिए बना था, वह अब मुख्य रूप से एक व्यापारिक प्रतिष्ठान की तरह चलाया जा रहा है।
यह कदम कई अहम सवाल खड़े करता है, क्योंकि अस्पताल के भवन, बुनियादी ढांचा और चिकित्सीय उपकरण कई दशकों के दौरान विदेशी मिशन साझेदारों की उदारता और विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (FCRA) के तहत मिले अनुदान से तैयार हुए थे। ये संसाधन केवल धर्मार्थ सेवा और मसीही मिशन को आगे बढ़ाने के लिए दान में दिए गए थे, न कि व्यावसायिक उपयोग या निजी वित्तीय मुनाफे के लिए।
इसलिए, मेरा 'यूनाइटेड चर्च ऑफ क्राइस्ट' से आदरपूर्वक अनुरोध है कि वह इवेंजेलिकल मिशन अस्पताल के वर्तमान प्रबंधन और इसके उपयोग की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराए।
विशेष रूप से, नीचे दिए गए बिंदुओं की गहन जांच होनी चाहिए:
* क्या अस्पताल की संपत्ति को लीज या सब-लीज पर देना चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया, छत्तीसगढ़ डायोसिस और UCNITA (यूनाइटेड काउंसिल फॉर नॉर्थ इंडिया क्रिश्चियन ट्रस्ट एसोसिएशन) के नियमों और संविधान के अनुसार कानूनी रूप से सही था?
* क्या इस मिशन संस्थान के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति देने से पहले सक्षम चर्च अधिकारियों, जिसमें चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया की सिनॉड भी शामिल है, से पूर्व अनुमति ली गई थी?
* क्या मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), जिला मुंगेली और कलेक्टर, मुंगेली को अस्पताल के मालिकाना हक, प्रबंधन या संचालन में किसी बदलाव की सूचना दी गई थी या उनसे मंजूरी ली गई थी?
* क्या व्यावसायिक संचालन की अनुमति देने से पहले विदेशी दानदाताओं की शर्तों और FCRA के तहत मिली संपत्तियों के नियमों की जांच की गई थी?
* क्या मौजूदा गतिविधियां उन अंतरराष्ट्रीय चर्चों, मिशन संस्थाओं और दानदाताओं की मंशा के अनुसार हैं, जिनके सहयोग से यह संस्थान बना और इतने वर्षों तक चला?
ये बातें सिर्फ कागजी या प्रशासनिक नहीं हैं, बल्कि इनके गंभीर कानूनी परिणाम भी हो सकते हैं।
मेरी जानकारी के अनुसार, पूर्व में भी कानूनी और प्रशासनिक कमियों के चलते छत्तीसगढ़ डायोसिस की कुछ संपत्तियों को सरकार अपने नियंत्रण में ले चुकी है। यदि इवेंजेलिकल मिशन अस्पताल का इसके सेवा भाव के विपरीत व्यावसायिक उपयोग जारी रहा, तो पूरी आशंका है कि सरकार इस संपत्ति के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकती है। ऐसा कदम उस ऐतिहासिक मिशन संस्थान को संकट में डाल सकता है, जिसने लगभग अस्सी वर्षों तक निष्ठापूर्वक लोगों की सेवा की है।
इस संपत्ति के हाथ से निकल जाने से न केवल चर्च की प्रतिष्ठा कम होगी, बल्कि उन अंतरराष्ट्रीय मिशन साझेदारों का भरोसा भी टूटेगा जिनके दान से अस्पताल बना, उपकरण खरीदे गए और पीढ़ियों तक इसकी सेवा जारी रही।
इन कारणों से, मेरा यूनाइटेड चर्च ऑफ क्राइस्ट से विनम्र निवेदन है कि:
* इवेंजेलिकल मिशन अस्पताल के वर्तमान प्रबंधन की जांच के लिए एक स्वतंत्र तथ्य-खोज समिति (fact-finding committee) नियुक्त की जाए।
* यह पता लगाया जाए कि क्या यह लीज या सब-लीज चर्च, नागरिक और चैरिटेबल ट्रस्ट के नियमों के अनुकूल है।
* यह जांचा जाए कि क्या सिनॉड, UCNITA, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से सभी जरूरी मंजूरियां ली गई थीं।
* यह देखा जाए कि क्या अंतरराष्ट्रीय दान और FCRA अनुदान से मिली संपत्तियों का उपयोग दानदाताओं की इच्छा और भारतीय कानूनों के अनुसार ही हो रहा है।
* यदि आवश्यक हो, तो अस्पताल को उसके मूल धर्मार्थ मसीही स्वास्थ्य सेवा के रूप में लौटाने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदमों की सिफारिश की जाए।
इवेंजेलिकल मिशन अस्पताल केवल एक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। यह डॉ. रूथ कैटन जैसे मिशनरियों के त्याग, डॉ. कुसुम मसीह व श्री एस. के. मसीह की जीवन भर की सेवा, और दुनिया भर के चर्चों व दानदाताओं के सहयोग से बनी एक पवित्र धरोहर है। इस धरोहर की रक्षा पूरी पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी से की जानी चाहिए।
मुझे पूरा विश्वास है कि यूनाइटेड चर्च ऑफ क्राइस्ट इस विषय को गंभीरता से लेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक मिशन संस्थान को सुरक्षित रखने हेतु आवश्यक कदम उठाएगा।
आपके विचार और समय के लिए धन्यवाद।
भवदीय,
जे. रॉबिन
बैतालपुर चर्च, बैतालपुर
जिला: मुंगेली, छत्तीसगढ़, भारत
संलग्नक: इवेंजेलिकल मिशन अस्पताल, बैतालपुर का सार्वजनिक विज्ञापन (जुलाई 2026)।