24hnbc रावण के 10 सिर थे राहुल ने छह चेहरे दिखाएं हैं चार खाली
Saturday, 10 Oct 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 11 अक्टूबर 2026।
वर्ष 2026 की शारदीय नवरात्रि देश में चल रही विचारधारा की लड़ाई के लिए निर्णायक है। राहुल गांधी कई सालों से इस विचारधारा की लड़ाई का विश्लेषण करते चले आ रहे हैं। आज 11 अक्टूबर को नवरात्रि का पहला दिन है और हम सीधे रावण दहन की बात कर रहे हैं। इस बार का रावण दहन असाधारण है और दहन करने वाले हाथ अल्फा बीटा हैं। कोई सोच सकता है कि हमने जेन जी का नाम नहीं लिया। राहुल गांधी ने टुक टुक करते हुए सुनील गावस्कर की तर्ज पर सेंचुरी से ज्यादा मार दी है और अब उनके बल्ले से निकले से निकले हुए स्ट्रोक अल्फा बीटा तक जाते हैं इसलिए रावण दहन तो अल्फा बीटा ही करेगा।
छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी सिस्टम में बैठे छह चेहरे दिखते हैं चार खाली हैं और यही वो चार खंड है जो अलग-अलग राज्यों में बदले जाएंगे। तो याद करें कि छात्रों की गूंज कार्यक्रम में छह चेहरे कौन हैं पहले मोदी, दूसरा शाह फिर भागवत, डोभाल, ज्ञानेश और अड़ानी किसी भी रावण को चलाने के लिए जी धन की जरूरत होती है उसका स्रोत सबसे महत्वपूर्ण है। 2014 के पहले जब मोदी जी ने दिल्ली फतह पर काम शुरू किया तो उन्होंने फ्यूल की व्यवस्था की और यह फ्यूल तब से अब तक अड़ानी ही दे रहा है तब और अब में अंतर यह आया कि अड़ानी की मजबूती गुजरात से शुरू हुई थी और उनका पेट अब पूरा देश भरता है। झारखंड हो, छत्तीसगढ़ हो या अंडमान निकोबार द्वीप हर जगह की प्राकृतिक संपदा केवल एक ही आदमी के लिए निछावर है। निछावर किसने की अब इस पर बोलने का कोई मतलब नहीं बचता.... एक बहुत ही समीकरण के तहत आरएसएस ने जुगत भिड़ाई और अपने उस कुविचार को पूरा किया जो उसने संविधान बनने के बाद रामलीला मैदान में संविधान जलते हुए देखा था। इसी बात को राहुल गांधी ने पकड़कर रखा है अब तो वह स्पष्ट कहते हैं कि कितनी ही एफआईआर कर लो हम नहीं रुकेंगे। उन्होंने देश के उसे युवा वर्ग से तादात्म्य बना लिया है जिसे वोट देते हुए दो बार हो चुका और उससे भी बनाया जिसे पहली बार वोट देना है। यह सब कुछ अचानक नहीं हुआ उन्होंने जब भारत जोड़ो यात्रा शुरू की थी तभी आगे वे क्या-क्या करेंगे और चंड मुंड क्या-क्या करेंगे इसका उन्हें पूरा आवास था। इस दौरान राहुल गांधी को क्या नहीं कहा गया अभी भी भाजपा के प्रवक्ता यही सब कहते हैं कल देश में चल रहे आंदोलन को विदेशी ताकतों का षड्यंत्र कह दिया गया जो कि भाजपा का अजमाया हुआ अस्त्र है। देश में और असहमति की हर आवाज को ऐसे ही आरोप लगाकर दबाया गया।
छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ने तो यह कहा कि कांग्रेस पहले सोनिया गांधी पर जवाब दे की नागरिक बनने के पहले से ही उन्होंने वोट कैसे दे दिया। वित्त मंत्री को ऐसा बोलने के पहले एक बार सोचना था कि देश का लोकतंत्र और एक व्यक्ति के रूप में सोनिया गांधी में से बड़ा कौन है। जिस चुनाव आयोग ने करोड़ों लोगों का मताधिकार छीन लिया उस पर चर्चा ना करके वो सोनिया गांधी के एक वोट की बात कर रहे हैं। पर अच्छा है लोकतंत्र बचाओ आंदोलन को और ज्यादा चलना चाहिए तभी तो सिस्टम के अंदर आरएसएस ने जितने मुखौटे फिट किए हैं वे सब बाहर निकलेंगे और छह चेहरों के बाद खाली पड़े स्थान पर फिट होंगे।