24hnbc लंबे समय तक देश अनइथिकल सरकार को कैसे सहेगा
Friday, 02 Oct 2026 00:00 am
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बिलासपुर, 2 अक्टूबर 2026।
ऐसा कोई भी राजनीतिक दल जिस पर वोट चुराकर सरकार बनाने का आरोप लग जाए निश्चित ही उसका सरकार चलाने का नैतिक बल जिसे इकबाल कहा जाता है खत्म हो जाता है और यदि ऐसा राजनीतिक दल अन्य दलों के सहयोग से सरकार चल रहा है मतलब वह स्वयं स्पष्ट बहुमत में नहीं है तो सहयोगी राजनीतिक दलों की नैतिकता इसी में है कि वे अपना अपना समर्थन वापस ले कारण व्यापक देश हित। देश में दो बार भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई हालांकि दूसरी बार भी ईवीएम में छेड़खानी के आरोप कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लगाए थे पर उसे समय उन आरोपों पर गंभीरता से विचार करने के स्थान पर लोगों ने उन्हें हंसी में उड़ाया परिणाम तीसरी बार भी बीजेपी की सरकार बन गई। हां इतना अंतर जरूर आया कि अब की बार 400 पर के नारे के साथ उतरी भाजपा 240 पर ठिठक गई और उसे आंध्र के चंद्रबाबू नायडू और बिहार के नीतीश कुमार का समर्थन लेना पड़ा।
लोकसभा के चुनाव के परिणामों के बाद कुछ विधानसभा के चुनाव हुए और एक-एक करके भारतीय जनता पार्टी की सरकारें बनी। ऐसा होने से भाजपा को भले नैतिक बल मिला हो पर वह झूठा था उलट चुनाव में गड़बड़ी करके सरकार बनाने से उनका प्रभाव नकारात्मक हो गया। 2026 में ही एलओपी ने कई टन कागज के साथ प्रेस वार्ता की और चुनाव आयोग में हो रही गड़बड़ियों को बताया तब भी स्पष्टीकरण के स्थान पर मुख्य चुनाव अभियुक्त ने उल्टा राहुल गांधी को देश से माफी मांगने की बात कही और अब इंडियन एक्सप्रेस और द हिंदू की रिपोर्ट्स के बाद स्पष्ट नजर आ रहा है कि लोकसभा के चुनाव और राज्यों की विधानसभा के चुनाव किस तरह वोटर लिस्ट में गड़बड़ी करके जीते गए। इस सब के बीच भारत है सरकार का चिन, सोवियत संघ, अमेरिका और जापान के साथ व्यापार समझौता दिख रहा है कि सरकार के पास नीति नहीं केवल बाजार का तरीका है। इसराइल के साथ भारत की दोस्ती और उसका घरेलू चुनाव पर असर सीधा दिख रहा है कि डिजिटल सिस्टम को किस तरह व्यक्ति की स्वतंत्रता को खत्म करने का तरीका बना लिया गया। अब जब देश आंदोलन के दौर में प्रवेश कर रहा है तब हमें देखने मिलेगा की सरकार किस तरह फेस आइडेंटिफिकेशन सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग करेगी। इसलिए नायडू जी और नीतीश कुमार को व्यापक लोकतंत्र हित में निर्णय लेना चाहिए कि समर्थन कब वापस लेना है अन्यथा जिस समय भी देश के लोकतंत्र के इतिहास का हिसाब होगा चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार के साथ अच्छे लोकतांत्रिक नेता होने का निर्णय नहीं होगा।