24hnbc आत्म मुग्ध और सेवानिवृत्ति के बीच भाजपा नेताओं की गुटबाजी
Sunday, 20 Sep 2026 00:00 am
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बिलासपुर, 19 सितंबर 2026।
छत्तीसगढ़ की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के लिए बिलासपुर जिला बेहद अहम है पर यहां के नेताओं के बीच की गुटबाजी दिया उत्सव भी समाप्त नहीं कर सका। विकास के लिए तीन विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है। केंद्र के स्तर पर शहरी और आवास राज्य के स्तर पर नगरी निकाय और पीडब्ल्यूडी बिलासपुर जिले में इन दोनों विभाग के मंत्री हैं पर जिले में विकास नाम की चिड़िया कहां गुम गई है कोई नहीं जानता। किसी भी क्षेत्र में चले जाओ निगम की रोड हो या पीडब्ल्यूडी की हालात बत्तर है। जिले में शहरी विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री की लगातार उपस्थिति से राज्य सरकार के अन्य मंत्रियों ने यहां रुचि लेना खत्म कर दिया है। सबसे बड़ा उदाहरण जिला पंचायत के कैबिनेट मंत्री राम विचार नेताम। पद ग्रहण करने के बाद कभी भी जिले में समीक्षा बैठक नहीं किये जबकि इसके पूर्व जब वे मंत्री थे बिलासपुर पर विशेष ध्यान देते थे।
डिप्टी सीएम लगातार बिलासपुर में रहते हैं पर शहर हो या शहर के बाहर कहीं भी सरकारी योजनाएं उस गति से नहीं चलती जिसे संतोष दायक कहा जा सके एक्सीलेंस की बात ही छोड़ो। दीप उत्सव के समय नगर विधायक की रुचि किसी अन्य जिले में थी। तखतपुर विधायक इन दोनों आत्म मुग्ध स्थिति में है उन्हें अपने आसपास किसी अन्य की उपस्थिति से कोई लेना-देना नहीं है। शायद वे स्वयं जानते हैं कि नए विधानसभा चुनाव के पहले वे स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले लेंगे। जिले में एक समय बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक का प्रभाव दिखाई देता था पर अब वैसा नहीं है वे अपनी विधानसभा तक ही सीमित हैं। सरकार बनने के बाद बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने कुछ दिन अति सक्रियता दिखाई विधानसभा के अंदर भी काफी उछाल कूद की और अंत में बिलासपुर विधायक द्वारा की गई अप्रत्यक्ष आलोचना सदन में प्रश्न पूछ कर कोई सक्रिय नहीं कहलाता के शिकार बने। अब तो उन्हीं के विधानसभा क्षेत्र में धरना प्रदर्शन हो जाते हैं। और उन धरनों को कोई सत्ता पक्ष का नेता समाप्त नहीं कराता बल्कि उसे पूरे घटनाक्रम को देखकर लगता है कि धरने का इशारा सत्ताधारी दल के किसी नेता की ओर से हुआ और धरने का समापन कांग्रेस विधायक ने करा दिया।
बिलासपुर में विकास के दो पैमाने जिसका सीधा संबंध जनता से है अब लड़खड़ा के चल रहे हैं। रेल और हवाई जहाज , बिजली की बसें आज तक नहीं मिली, नदी में क्रुज कभी नहीं चला, शहर की सीवरेज में कितने किलो मानव मल बहा उसका आंकड़ा निकाल कर परियोजना की लागत से तुलना की जाए तो पता चलेगा कि भाजपा किस दलदल में बैठी है। स्वास्थ्य सुविधाएं किस स्तर पर हैं कि अपनी ही बनाई सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को सरकार चला नहीं पा रही है। शिक्षण संस्थाएं नाम मात्र की ऑक्सीजन पर हैं। स्कूली शिक्षा केवल सरकार के आयोजन में भीड़ बढ़ने वाला बन रहा है इस बार सत्ताधारी पार्टी पर प्रशासन का पंजा स्पष्ट दिखता है। सत्ताधारी पार्टी के नेता या तो आत्म मुग्ध है या अगले चुनाव के पहले रिटायर्ड होने की तैयारी में ...