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24hnbc डायोसिस की शैक्षणिक गतिविधियों को बचाना सब की जिम्मेदारी
Friday, 18 Sep 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 19 सितंबर 2026। 
छत्तीसगढ़ में अल्पसंख्यक समुदाय के नाम पर बहुत सी शिक्षण संस्था हैं। इनमें जिन शिक्षण संस्थाओं ने ख्याति प्राप्त की उनमें ईसाई समाज के द्वारा संचालित शिक्षण संस्थाएं ज्यादा है और वर्तमान में इनमें से कुछ संस्थाएं समिति के प्रशासनिक झगड़ों की वजह से परेशानी में चल रही है। इन शिक्षण संस्थानों की बेहतरी के लिए सोचा हर उसे व्यक्ति का कर्तव्य है जिसे समाज में सस्ती दर पर शिक्षा चाहिए। कारण सरकार जितना भी कहे पर उद्योगपतियों की शिक्षण संस्थाएं लाभ हानि से ऊपर उठकर काम नहीं करती। वे जिस तरह अपने धंधे को बैलेंस शीट समझते हैं वैसे ही मानसिकता से शिक्षण संस्था चलाते हैं। यह भी देखा जाता है कि शिक्षण संस्था के घाटे को कोचिंग सेंटर चलाकर वसूल लेते हैं। अब मूल बात की छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन पंजीकृत की शिक्षण संस्थाओं का उन्नयन कैसे हो...?
हम उदाहरण के रूप में बिलासपुर को रखते हैं बर्जेस स्कूल जमीन बेचकर या किराए पर चढ़कर स्कूल नहीं बचाया जा सकता स्कूल बचाने के लिए स्कूल के संबंधित कार्यों में ही गुणात्मक सुधार जरूरी है। छात्र-छात्राओं का प्रवेश हो के लिए एक तरीका यह हो सकता है कि पढ़ाई छोड़ चुके छात्र-छात्राओं को निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की जाए। छोटी कक्षाओं में जरूरतमंद विद्यार्थी को पूरे शैक्षणिक सत्र में प्रवेश दिया जाए। उच्च नंबरों से पास हुए विद्यार्थियों की आंसर शीट को कक्षाओं में दिखाया जाए और शिक्षकों को बताया जाए की इस तरह के उत्तर ही सफलता दिलाएंगे। 
बगैर कोचिंग प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी नहीं हो सकती लिहाजा इस विधा के लोगों की सेवा स्कूल प्रबंधन सीधा प्राप्त करें। इस मामले में थोड़े समीकरणों से लाभ लिया जा सकता है जैसे जिले के ऐसे नौकरशाह जो पढ़ने में रुचि रखते हैं प्रबंधन उनसे संपर्क करें और निवेदन करें कि वे कोचिंग संस्थानों में न जाकर स्कूल आकर छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षित करें। चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत प्रोफेशनल्स की सेवा भी ली जा सकती है। कैरियर काउंसलर की मदद भी ली जा सकती है। इन स्कूलों को अस्तित्व में रखना समाज के बड़े तबके के हित में है अन्यथा स्टार फैसिलिटी वाले स्कूल सर्वहारा वर्ग को शिक्षा से वंचित कर देंगे। और सरकार तो शिक्षा से हाथ खींच ही रही है।