24hnbc छत्तीसगढ़ डायोसिस और छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन के पदाधिकारियों के झूठ, कोर्ट में अपने निजी लाभ के लिए करते हैं कथन
Wednesday, 16 Sep 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 17 सितंबर 2026।
छत्तीसगढ़ राज्य के भीतर ईसाई समाज के 19 स्कूलों का संचालन होता है। और कागजों पर इन स्कूलों को छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन पंजीकृत नाम की एक समिति चलती है। इन स्कूलों के संचालन के वैधानिक स्थिति संदेहास्पद है। समय-समय पे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में विभिन्न पदाधिकारी द्वारा जो प्रकरण प्रस्तुत किए गए उनमें संलग्न दस्तावेज स्पष्ट करते हैं कि स्कूल का संचालन जबलपुर डायोसिस के अधीन है। व्हिसल ब्लोअर यशराज सिंह ने कोर्ट के समक्ष एक जनहित याचिका 71/2016 प्रस्तुत की। इस याचिका में जब कभी 19 स्कूल के प्राचार्यों ने शपथ पत्र दिए और बताया कि स्कूल का संचालन जबलपुर डायोसिस के पास है।
पीआईएल में दिए गए निर्देश के बाद पंजीयन फार्म संस्थाओं ने स्कूलों का ऑडिट किया समिति का ऑडिट किया और 2 करोड़ 6 लाख रुपए का वित्तीय घपला पाया। नियम अनुसार दो काम होने थे रजिस्टर को समिति के कथित पदाधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी थी और दूसरा 2 करोड़ 6 लाख रुपए की वसूली होनी थी पर यह काम उन्होंने नहीं किया। परिणाम पीआईएल के आवेदन कर्ता यशराज सिंह ने संबंधित थाने में लिखित शिकायत की काफी संघर्षों के बाद 2025 में एफआईआर हुई और नितिन लॉरेंस, जयदीप रॉबिंसन, रूपिका लॉरेंस, अजय उमेश जेम्स, एसके नंदा और बीके नायक के विरुद्ध 420, 467, 468, 471, 34 के तहत अपराध दर्ज हुए।
एक अन्य याचिका प्रकरण क्रमांक डब्ल्यूपीसी 759/2015 याचिका कर्ता निशिता हंसादास प्राचार्य बर्जेस स्कूल बिलासपुर को उसे समय के समिति पदाधिकारी रावल्ट अली, अतुल ऑथर और शशि वाघे ने नौकरी से निलंबित कर दिया। इस पिटीशन में जबलपुर डायोसिस की ओर से पदाधिकारी नेल्सन उपस्थित हुए और उन्होंने कोर्ट में शपथ पत्र दिया बताया की स्कूल का संचालन जबलपुर डायोसिस के पास है और हमने निशिता हंसादास को निलंबित ही नहीं किया परिणाम याचिका नीराकृत हुई और निशिता हंसादास दोबारा नौकरी पर आ गई। मतलब पीआईएल और डब्लूपीसी में एक ही तथ्य है की 19 स्कूल का संचालन छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन पंजीकृत के पास है ही नहीं भले ही पदाधिकारी कोई भी बनता रहे स्कूल संचालक जबलपुर डायोसिस के पास है और इसी आधार पर छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन पंजीकृत के कथित पदाधिकारी वित्तीय अनियमितता में फंसे...।
पांच बार सेशन कोर्ट रायपुर में, पांच बार हाई कोर्ट बिलासपुर में और एक बार देश की सर्वोच्च अदालत में जब सिविल लाइन थाना रायपुर की जांच डायरी गई हर बार विद्यावान न्यायाधीशों ने यह देखा की स्कूलों का संचालन जबलपुर डायोसिस के अधीन है छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन पंजीकृत के पास नहीं है। इस समिति के दोनों गुट जिसका नेतृत्व क्रमशः नितिन लॉरेंस, जयदीप रॉबिंसन और शशि वाघे, अतुल ऑथर करते हैं कोर्ट के समक्ष नूरा कुश्ती करते हैं । उन्होंने स्वयं वे जब कभी भी पावर में आए विधि के विपरीत जाकर निलंबन किये। वर्तमान में उच्च न्यायालय के समक्ष दो याचिकाएं लंबित हैं। एक डब्ल्यूपीसीआर 501/2025, पीटीशनर बीके नायक जो दिल्ली में बैठते हैं और ईसाई समाज के परंपरा अनुसार मॉडरेटर है। उन्होंने याचिका लगाई है कि सिविल लाइन थाना रायपुर में दर्ज एफआईआर से उनका नाम डिलीट किया जाए क्योंकि यह मामला अपराधिक नहीं सिविल है। इस एफआईआर में अजय उमेश जेम्स आरोपी हैं ये एकमात्र ऐसा पदाधिकारी है जो जबलपुर डायोसिस में भी पदाधिकारी रहा और छत्तीसगढ़ में भी पदाधिकारी रहा। पीआईएल में इनका भी शपथ पत्र है जिसमें ये कहते हैं की स्कूल संचालक जबलपुर का है और जब यह 2018 में छत्तीसगढ़ डायोसिस में पदाधिकारी बने तब इन्होंने स्कूलों का संचालन किया और नियुक्ति भी कर दी। स्पष्ट है कि ये पदाधिकारी कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं। एक अन्य निलंबित प्राचार्य गौरेला पेंड्रा की भावना आर्थर की याचिका भी इस समय छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के समक्ष लंबित है उन्हें कुछ माह पूर्व नितिन लॉरेंस वाली समिति ने निलंबित कर दिया था। आरोप था बगैर सूचना वे विदेशी यात्रा पर चली गई थी। नितिन लॉरेंस गुट ने अभी हाल ही में एक विवादित चुनाव से मान्यता प्राप्त कर स्कूलों के 30 से अधिक लोगों को नौकरी से निलंबित किया पर समिति के दूसरे गुट ने जब शासन के समक्ष अपील प्रस्तुत किये तो उन्होंने नितिन लॉरेंस गुट द्वारा दफ्तरों में ताला तोड़कर कब्जा करने की शिकायत की बगैर धारा 27।
उपसचिव ने 7.9.2026 को आवेदक की अपील स्वीकार की और विरोधी गुट पर स्थगन दिया। यहां यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि अपीलार्थी ने नितिन लॉरेंस द्वारा किए गए दर्जनों निलंबन पर छुट्टी क्यों साधी? छत्तीसगढ़ डायोसिस और छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन पंजीकृत के जितने भी पदाधिकारी हैं अधिकांश की रिश्तेदार या पत्नीयां स्कूल में स्कूल में प्राचार्य है। सालेम स्कूल प्राचार्य रूपिका लॉरेंस पति नितिन लॉरेंस, पेंड्रा स्कूल प्राचार्य भावना आर्थर पति अतुल आर्थर और यही हाल मुंगेली स्कूल का भी है पदाधिकारी जयदीप रॉबिंसन की पत्नी सरकारी सेवा में है तो उन्होंने अपनी भांजी को वित्तीय प्रभार दे रखे हैं। लगता है कि पूरे ईसाई समाज के पदाधिकारी स्कूलों में अपना वंशवाद चलते हैं। और एक गुट दूसरे गुट के रिश्तेदारों को निलंबित करता है। दोनों पदाधिकारी नितिन लॉरेंस और अतुल ऑथर राजनीतिक रूप से भारतीय जनता पार्टी के वेशभूषा में देखे जाते हैं। यहां प्रश्न उठता है कि क्या किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता है या अपने समिति के आर्थिक गड़बड़ी को छुपाने के लिए वेशभूषा धारण करते हैं। माननीय न्यायालय को तो चाहिए कि 2015 से उनके समक्ष जितने भी इन मामलों से संबद्ध प्रकरण आए सबको एक साथ लिंक कर ले और देख ले की ये पदाधिकारी अपने निजी लाभ के लिए किस तरह न्यायालय में झूठ बोलते हैं। क्योंकि ये वे ही पदाधिकारी हैं जो जेकमेन मेमोरियल अस्पताल के संबंध में कमिश्नर कोर्ट से आज तक केवल लोकस न होने के कारण हारते हैं और हर एक अलग-अलग याचिका में उनके पद नाम बदल जाते हैं।
इस पूरे समाचार के निष्कर्ष को कार्यालय सहायक श्रम आयुक्त रायपुर के इस पत्र में देखें। श्रम आयुक्त कार्यालय से एक नोटिस सालेम स्कूल रायपुर को गया है। चार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने आयुक्त के समक्ष गुहार लगाई कि उन्हें दो माह से वेतन नहीं मिल रहा है इस प्रकरण की पेशी 18.9 को है। वेतन भुगतान करके हाथ झाड़ लिए जाए एक गुट ने बिलासपुर के बर्जेस स्कूल अकाउंट से धनराशि आहरण की इसी बीच 7.9.2026 को उपसचिव छत्तीसगढ़ शासन का स्थगन हो गया है और सबसे महत्वपूर्ण तथ्य की नौकरी पर रखना या निकाल देना छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन पंजीकृत के बस में है ही नहीं क्योंकि स्कूल तो उनके है ही नहीं पर दोनों समितियां इस तथ्य को किसी भी शासकीय कार्यालय के समक्ष नहीं आने देना चाहती और खजाने से माल निकालते रहते हैं।