24hnbc कबाड़ दुकानों पर पुलिस की कार्रवाई से मचा हड़कंप, बड़े कबाड़ियों पर कार्रवाई का इंतजार
Friday, 04 Sep 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 5 सितंबर 2026।
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित कबाड़ दुकानों को लेकर पुलिस की कार्रवाई के बाद छोटे-बड़े कबाड़ कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है। हालांकि पुलिस किस व्यापक योजना के तहत यह अभियान चला रही है, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ कबाड़ दुकानों और संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, लेकिन शहर के बड़े कबाड़ कारोबारियों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में कई बड़े कबाड़ कारोबारी लंबे समय से अपना कारोबार संचालित कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कबाड़ दुकानों में दिनभर लोहे को काटने, ठोकने और पीटने की तेज आवाज से आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। इसके अलावा इन दुकानों में चोरी का सामान पहुंचने की आशंका भी समय-समय पर जताई जाती रही है।
खपरगंज की कबाड़ दुकानों को लेकर भी सवाल
खपरगंज क्षेत्र में दो बड़ी कबाड़ दुकानों के घटना के बाद बंद होने की चर्चा थी, लेकिन अब इन दुकानों में फिर से गतिविधियां शुरू होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि पुलिस ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे कबाड़ियों पर कार्रवाई कर रही है तो शहर के बड़े कबाड़ कारोबारियों की भी जांच क्यों नहीं की जा रही है।
कबाड़ कारोबार में चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त को लेकर भी गंभीर सवाल उठते रहे हैं। जानकारों के मुताबिक बाजार में जिस लोहे के पाइप की कीमत करीब 80 रुपये किलो तक हो सकती है, वही चोरी के बाद कबाड़ी को काफी कम कीमत पर बेचे जाने की आशंका रहती है। इसी वजह से यह जांच का विषय है कि कहीं कुछ कबाड़ दुकानें चोरी के सामान की खपत का माध्यम तो नहीं बन रही हैं।
बड़े कारोबारियों तक क्यों नहीं पहुंच रही कार्रवाई? पुलिस की कार्रवाई से कबाड़ कारोबारियों में डर का माहौल जरूर दिखाई दे रहा है, लेकिन इसका कारोबार पर कितना असर पड़ा है, यह स्पष्ट नहीं है। शहर में कुछ कबाड़ दुकानों के संबंध में असामाजिक तत्वों के जमावड़े और संदिग्ध गतिविधियों की चर्चाएं भी होती रही हैं। हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से भी इस संबंध में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस यदि खपरगंज सहित शहर के प्रमुख कबाड़ दुकानों की नियमित जांच करे और दुकानों में रखे सामान का रिकॉर्ड, खरीदी-बिक्री के दस्तावेज तथा संदिग्ध सामग्री की जांच करे तो स्थिति काफी स्पष्ट हो सकती है। खासकर चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के लिए छोटे कबाड़ियों के साथ-साथ उन बड़े कारोबारियों तक भी पहुंचना जरूरी है, जहां कथित तौर पर चोरी का माल पहुंचने की आशंका जताई जाती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस का अभियान केवल ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कबाड़ियों तक सीमित रहता है या शहर के प्रभावशाली और बड़े कबाड़ कारोबारियों की दुकानों की भी जांच कर कार्रवाई की जाती है।