24hnbc पीड़ित के पास अधिवक्ता को दिखाने फाइल भी नहीं थी बड़ा मार्मिक है यह प्रकरण
Monday, 24 Aug 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 25 अगस्त 2026।
हत्या का ऐसा आपराधिक मामला जिसमें सत्र न्यायालय से दोषियों को सजा हो चुकी हो और फिर हाई कोर्ट ने उसे मामले में अभियुक्तों को बरी किया हो। ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग दो तरीके से होती है एक अधिवक्ताओं की बहस और उसे पर जस्टिस का निर्णय, ट्रायल कोर्ट के निर्णय में कहां कमी है। दूसरा तरीका है मामले का फीचर के रूप में पेश किया जाना, इस प्रकरण में हमने उच्च न्यायालय में इस मामले की पैरवी करने वाली अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला के लिखे हुए सार को कहीं भी ना तो बदला है ना ही दुरुस्त किया। बिलासपुर प्रियंका का कार्य क्षेत्र है एक्टिविस्ट के रूप में उनकी अपनी विशेष स्थिति है और न्यायालिन मामलों में वे कमजोर पीड़ितों के लिए हमेशा सक्रिय रहती है।
वर्ष 2022 के इस केस ने बहुत कुछ सिखाया, आइये आपको भी साझा करतीं हू, आजीवन कारावास की सजा से उच्च न्यायालय से बरी होने तक की कहानी
जांजगीर के निवासी बुजुर्ग बंशी यादव, उम्र 70 वर्ष,मेरे पास मेरे चैम्बर किसी अधिवक्ता साथी के द्वारा भेजे गए थे.
बंशी जी ने बताया कि उनका बेटा देव प्रकाश यादव कई सालो से जेल मे है,बंशी यादव जो पिता है, वो खुद भी इसी हत्या के मामले मे जेल मे थे उन्हें झूठा फसाया गया था लेकिन पैसा नहीं होने से अपने तरफ से वकील नहीं कर सकते थे, इसके चलते जिला विधिक के तरफ से वकील मिला था.
वर्ष 2015 मे बंशी यादव दोष मुक्त हो गए लेकिन बेटा देव प्रकाश को आजीवन कारावास और 500 का जुर्माना की सजा हो गई।
अब बंशी यादव के जीवन मे उनकी देखरेख करने वाला कोई नहीं बच्चा, जो जमीन और घर था, वो रिश्तेदार और अन्य लोगो ने कब्ज़ा कर लिया, बेटा जेल नमे सजा काट रहा था, बंशी यादव पहले नौकरी करते थे लेकिन इस मामले के बाद से बंशी दिमागी तौर पर भी थोड़ा डिस्टर्ब हो गए और बेटे के सजा के बाद भीख मांगकर और कभी भी कही मंदिर मे तो कभी किसी पेड़ के नीचे रूककर खानाबदोश जीवन जीने लगे, भीख मांग कर गुजर बसर करने लगे.
साथ हीं बेटे की पैरवी के लिए जगह जगह वकीलों के पास जाते, इस बीच उनकी मुलाकात एक वकील साहब के माध्यम से बंशी यादव मेरे पास वर्ष 2022 मे आए और बोले की मैडम मेरे बेटे ने और मैंने कोई हत्या नहीं की थी, हमको झूठा फसाया गया था.
बंशी जी के पास ना कोई फ़ाइल थी और न हीं पूरे कागज, बस बेटे का नाम बताया और बताया कि किसी ने 10,000 लिए थे लेकिन बेटा बाहर नहीं आ सका, उसके बाद जब जानकारी जुटाई तब पता चला कि देव प्रकाश की माननीय उच्च न्यायालय से 2016 मे जमानत तो मिल गयी थी लेकिन जमानत दार नहीं होने के कारण देव प्रकाश जेल से बाहर नहीं आ सका हैँ, जिसके बाद 2022 मे मेरे द्वारा तैयारी के साथ माननीय उच्च न्यायालय मे जमानत के सम्बन्ध मे पुनः याचिका लगाई, जिस पर मुचलके पर छोड़े जाने का आदेश करवाया गया, तब देव प्रकाश घटना के 9 साल बाद जेल से बाहर आया, देव प्रकाश ने जेल से बाहर आते हीं एक हीं बात बोली, मैडम मुझे तो यकीन हीं नहीं हो रहा कि मैं जेल से बाहर आ चुका हूँ, लगता हीं नहीं था कि कभी बाहर आ सकूंगा, ऐसा कहते हुए देव प्रकाश बार बार धन्यवाद कहने लगे,पैर पर गिर गए, यें भावुक पल जेल के बाहर घट रहा था और तब पहली बार जेल मे कैद ऐसे लोगो के लिए सोचा कि वाकई कितना दुःखद था किसी का जमानत के बाद भी जेल मे कई साल रह जाना.
2022 से आज तक देव प्रकाश के साथ संपर्क मे हूं, कोई भी समस्या होती तो देव प्रकाश पहले मुझे फोन करते, बार बार कहते है मैडम मेरी ज़मीन भी चली गयी इस केस के चक्कर मे, आप ज़मीन का भी दिखवा दो, और पूरी ज़मीन आप ले लो, मैं बस हस्ती और यही कहती कि मुझे आपसे कोई ज़मीन नहीं चाहिए, केस का काम करुगी लेकिन देव प्रकाश तो देव प्रकाश है, बीते पाच से हर मुलाकात पर यही कहता है कि आप जांजगीर आ जाओ, और हमारे घर मे रहो आकर,मैं घर बना दूंगा आपका ...
लेकिन अब कल 20 /08/2026 को जब देव प्रकाश के उक्त अपील केस की माननीय उच्च न्यायलय की डिवीजन बेंच पर फाइनल सुनवाई /बहस होकर फैसला आ गया है, जिसमे माननीय उच्च न्यायालय की संजय के अग्रवाल जी एवं माननीय राधाकृष्ण अग्रवाल जी की बेंच से उक्त मामले मे हमारे पक्ष मे देव प्रकाश को बरी कर दिया और आजीवन करावास से सीधा बरी कर दिया गया है, एक बड़ी जीत हासिल की, जिसको हमारे जनहित चैम्बर की तरफ से देखा गया और केस की पैरवी मेरे द्वारा की गई.
अब जब फैसला आ गया है, तब मेरे पक्षकार देव प्रकाश और बंशी यादव जी से सम्पर्क तक नहीं हो सका हैँ, खुशी ज़ाहिर करना हैँ लेकिन उनकी जिंदगी आज भी गरीबी और समाज मे संघर्ष कर रही हैँ, जिस दिन खुद से कही से कॉल करेगा, उसी दिन खबर हो सकेगी उन्हें, फिलहाल आप सबसे यह कहानी साझा कर रही, अपनी खुशी जाहिर कर रही....
इस पूरी प्रक्रिया मे मैं मेरे जनहित चैम्बर के समस्त साथियों का, और माननीय उच्च न्यायालय का धन्यवाद पेश करती हू.
(तस्वीर 2022 की है, बुजुर्ग का नाम बंशी है, दुसरे का नाम देव प्रकाश है, बीच मे मैं हूं, जब देव प्रकाश बिलासपुर सेंट्रल जेल से बाहर आया था, उस दिन की यह तस्वीर और पोस्ट का snapshot हैँ )