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पीएम केयर कि ऑडिट कहती है बहुत कुछ डिजिटल इंडिया में 176 बिलियन के नोट बाजार में, किसका है ये पैसा
Tuesday, 25 Aug 2026 00:00 am
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बिलासपुर, 25 अगस्त 2026। 

पीएम केयर फंड का यह मामला बताता है कि कैसे देश के मुद्रा चिन्ह का उपयोग करके आम जनता को भ्रम में डाला जा सकता है और बाद में इसे इस हद तक निजी बताया जा सकता है कि ना तो उसका केंग से ऑडिट हो ना तो वह आरटीआई के दायरे में आए। 27 मार्च 2022 को जब लॉक डाउन लगा इस समय पीएम केयर फंड का उदय हुआ जबकि 1948 से ही पीएमएनआरएफ प्रधानमंत्री नेशनल रिलीफ फंड पीएम केयर फंड का उदय वह भी पीएम लगाकर साथ में अशोक स्तंभ का उपयोग करके इसके ट्रस्ट में गृहमंत्री और रक्षा मंत्री हैं। 

अभी हाल ही में इस फंड की ऑडिट रिपोर्ट अनधिकृत तरीके से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। इसे देखकर किसी के भी कान खड़े हो जाएं क्लोजिंग अमाउंट 8452 करोड रुपए है। खर्च के दो फंड विशेष रूप से दिखाई देते हैं चिल्ड्रन स्कीम में 27 लाख 84 हजार 840 रुपए दिया गया है जबकि फंड में कुल उपलब्ध रकम इससे 10 गुना ज्यादा थी। लॉक डाउन के समय संसद में भी जानकारी दे दी गई थी कि कितने बच्चों को इस फंड से स्कॉलरशिप दी जा रही है। बच्चों की संख्या और प्रश्न में बताई गई राशि ऑडिट रिपोर्ट से मैच नहीं करती। 

2024 - 25 में फंड का 93% पैसा बैंकों में एफडी किया गया और इसे 475 करोड़ रूपया ब्याज अर्जित हुआ। इसी दौरान गैलान घाटी का मामला हुआ था और देशभक्ति के नाम पर चीनी कंपनियों का बहिष्कार हुआ था यहां तक की छोटी आंख वाले गणेश तक और घर में लगने वाली झालर को भी चीनी बढ़कर बहिष्कार की अपील की गई पर इसी समय पीएम केयर फंड में टिक टॉक चीनी कंपनी 30 करोड रुपए देती है, शाओमी ने 10 करोड़, हुआवेई ने 7 करोड़ और वन प्लस ने एक करोड़ तो हम यह क्यों न माने की दुश्मन का पैसा पीएम केयर में क्यों आया। इतना ही नहीं पीएम केयर से बहुत बड़ी धनराशि कुछ निजी कंपनियों को दी गई और बाद में इन निजी कंपनियों ने वह पैसा पीएम केयर को वापस किया पर यह नहीं पता चला कि कंपनियों के पास जब वह पैसा था तब उसे पैसे का क्या हुआ। पीएम केयर ने इन कंपनियों का नाम भी नहीं बताया। सब को डिजिटल पेमेंट के लिए बोलने के बाद भी देश में इस समय जो धन राशि गैस के रूप में है वह भ्रष्टाचार का सुनियोजित तरीका है पहले इलेक्ट्रॉल बांड और अब पीएम केयर हाल ही में केंग की एक रिपोर्ट आई है जिसमें बताया गया है कि 15 मंत्रालय में 5428232 करोड रुपए नहीं पता कहां गए इन विभागों में 33973 उपयोगिता प्रमाण पत्र पेंडिंग है। दो मंत्रालय जो सर्वाधिक संदेश के घेरे में हैं उनमें पहले मंत्रालय हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर मिनिस्ट्री और दूसरा उच्च शिक्षा सीधी बात है इन दो मंत्रालयों की कमान धुर आरएसएस के खाटी समर्थन के पास है और उनके राज्य मंत्री केवल स्टेंप हैं। अभी भारतीय बाजार में 176 बिलियन नोट मार्केट में है जो कैश है जबकि पूरा मध्यम वर्ग डिजिटल पेमेंट पर ही चल रहा है तो 176 बिलियन के नोट नगद के रूप में कौन चलाता है। ध्यान रहे अर्बन मिनिस्ट्री का सबसे बड़ा फंड स्मार्ट सिटी सीधे पीएमओ के अंडर में आता है। और उच्च शिक्षा विभाग पेपर लीक को लेकर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करता है।