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24hnbc विज्ञापन या सेक्स पर चर्चा
Sunday, 23 Aug 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 24 अगस्त 2026। 
महानगर हो, नगर हो, कस्बा हो, या माजरा टोला आईवीएफ या अन्य तकनीकों से बच्चा पैदा किया जा सकता है के विज्ञापन लगे मिल जाएंगे और ये विज्ञापन किसी एक क्लीनिक के नहीं दर्जनों क्लिनिक के हैं। इसमें निजी अस्पताल से लेकर प्राइवेट लिमिटेड यहां तक की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के भी विज्ञापन बाजार में मौजूद हैं। ऐसा लगता है कि कुछ साल पहले तक जो गर्भधारण सामान्य सेक्स से हो जाता था अब उसे प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक तकनीक का इतना उपयोग करना पड़ता है की गर्भधारण करने के पहले ही तीन से चार लाख रुपए खर्च हो जाते हैं और किलकारी आपके घर में गूंजती है जबकि तिजोरी उनकी भर्ती है। 
वैज्ञानिक तौर तरीकों से बच्चा पैदा होगा आपका दांपत्य जीवन सुखी हो जाएगा के विज्ञापन अखबारों से ले कर आउटडोर कैंपेनिंग पर करोड़ों खर्च करते हैं और उसके मुकाबले भारत में गोद लेने के कॉन्सेप्ट पर कुछ भी खर्च नहीं किया जाता। बिलासपुर में श्रीकांत वर्मा मार्ग पर एक छोर से दूसरे छोर तक चले। इस विधा में जो जो लिखा है उससे लगता है कि क्लास रूम में पढ़ाई जाने वाली चीज सड़क पर बताई जा रही है। काम शुक्राणु, गर्भाशय की कोई समस्या, फैलोपियन ट्यूब में कोई समस्या, उम्र, पुरुष स्पर्म कमजोर होना से लेकर जाने किस-किस समस्या का निदान बताया जाता है। एक तरफ देश में पितृसत्तात्मक डंडे के चलते सेक्स पर खुली बातचीत नहीं की जाती, जो लड़कियां ऐसा करती हैं उन्हें औकात में रहने के तरीके बताए जाते हैं पर वैज्ञानिक पद्धति से गर्भधारण पर विज्ञापन ऐसा किया जाता है कि खुजराहो का मंदिर भी शर्मा जाए। यहां तक की जो डॉक्टर इन क्लीनिक का संचालन करते हैं वे अखबारों में फीचर भी छपवाते हैं। और फीचर तो पेड़ होता है इतना ही नहीं कुछ क्लीनिक के डॉक्टर स्वयं को राजनीति में सनातन व्यवस्था में इतना प्रचार रत रखते हैं कि उनके क्लीनिक का नाम और उनका सरनेम एक ही सिक्के के दो पहलू बन जाते हैं। शहर के भीतर दौड़ रहे ऑटो में ₹18000 में सामान्य प्रसव दवाई सहित का विज्ञापन खूब चल रहा है। इसका सीधा अर्थ है कि व्हीआईपी सुविधा वाले अस्पताल में इसका दाम तीन गुना हो जाएगा। क्योंकि जब देश के सांसद की विशेष समिति बोले की अस्पताल के रूम का खर्चा 3 स्टार फैसिलिटी से ज्यादा नहीं हो सकता तो समझने वाली बात है कि स्वास्थ्य सुविधाएं होटल के तर्ज पर चलेगी। भारत देश में गुजरात जिसे आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया गया वहां की महिलाओं ने सेरोगेट मदर अर्थात कोख बेचकर करोड़ों कमाए तब किसी सनातनी को धर्म खतरे में नहीं दिखी और अब इस गर्भधारण के लिए जब आईवीएफ तकनीक वाले लाखों कमाने की सोच रहे हैं कमाते हैं तब भी हमारी डिबेट का विषय लव जिहाद होता है।